प्रयागराज। प्रयागराज स्थित भारतीय स्टेट बैंक की त्रिवेणी शाखा में रखी बिहार के बेतिया राज की महारानी जानकी कुंवर की तिजोरी की चाबी का पता नहीं चलने से प्रशासन के सामने नई समस्या खड़ी हो गई है। लगभग 80 वर्ष पहले 1939 में रियासत के प्रबंधन ने यह तिजोरी बैंक के लाकर में रखवाई थी।
ताला तोड़वाना प्रशासन की मजबूरी
अब तिजोरी को बैंक से निकलवा कर उसे खोलने की कवायद शुरू हुई तो चाबी का ही पता नहीं चल रहा है। ऐसे में तिजोरी का ताला तोड़वाना प्रशासन की मजबूरी बन गई है। जल्द ही इसके लिए प्रशासनिक कमेटी का गठन होगा, जिसकी मौजूदगी में तिजोरी का ताला तोड़ा जाएगा। वैसे अभी बिहार राजस्व परिषद के अधिकारियों से इस बाबत वार्ता होगी और चाभी की तलाश के लिए कोशिशें की जाएंगी।
तिजोरी में हीरे मोती
इस तिजोरी में ऐतिहासिक दस्तावेजों के अलावा 200 करोड़ रुपये से ज्यादा के हीरे-मोती और सोने के जेवरात भी हैं। बिहार सरकार बेतिया राज के आखिरी राजा हरेंद्र किशोर सिंह व उनकी पत्नी जानकी कुंवर की संपत्ति अपने कब्जे में लेने जा रही है। सभी तरह की संपत्तियां खंगाली जा रही हैं। रानी जानकी कुंवर अपने आखिरी समय में प्रयागराज में ही रहीं। ऐसे में उनकी तिजोरी एसबीआइ की शाखा में भी रखी हुई है। जेवरात बिहार के संग्रहालय में रखे जाएंगे।
बिहार राजस्व परिषद तथा जिला प्रशासन के अधिकारियों की इसके लिए जल्द ही बैठक होगी। इस बैठक के बाद ही आगे की कार्यवाही की जाएगी। मुख्य राजस्व अधिकारी पंकज कुंवर का कहना है कि बिहार राजस्व परिषद का एक कार्यालय प्रयागराज में संचालित होने लगा है। बिहार राजस्व परिषद के अधिकारियों की तैनाती हो चुकी है। बैंक में तिजोरी को खुलवाने के लिए बिहार सरकार के अधिकारियों के निर्णय के बाद आगे की कार्यवाही की जाएगी।

