नगर में सुबह के समय हल्की धूप तो निकली हुई थी, वातावरण खतरनाक ढंग से प्रदूषण की चपेट में जा पहुंचेगा, इसका जरा भी गुमान न था। दिन चढ़ने के साथ ही वातावरण धुंधलाता चला गया। इस तरह प्रदूषित वातावरण पहली बार देख, लोग हैरान नजर आए ।
इस कारण आया वातावरण में बदलाव
आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान एरीज के वायुमंडलीय वरिष्ठ विज्ञानी डा नरेंद्र सिंह ने बताया कि तापमान में सामान्य से अधिक वृद्धि के कारण वातावरण में बदलाव आया है। जिस कारण मैदानी भागों का वायु प्रदूषण उठकर पर्वतीय क्षेत्रों में छाने लगा है। मैदानी भागों से प्रदूषण उठने का क्रम पिछले कुछ दिनों से शुरू हो गया था, जो आज बड़ी मात्रा में पहुंच गया और वातावरण को बुरी तरह अपनी चपेट में ले लिया।
इस बीच पर्वतीय क्षेत्रों में वाहनों के निरंतर वृद्धि के कारण वायु प्रदूषण की मात्रा में विस्तार हुआ है और अब मैदानी भागों से आया प्रदूषण स्थानीय प्रदूषण से मिक्स हो जाने के कारण वातावरण का दूषित होना स्वाभाविक है, जो आज देखने को मिला है।
पूरे पहाड़ में धुंधला है वातावरण
नैनीताल: डा नरेंद्र सिंह ने बताया कि नैनीताल ही नहीं बल्कि मुक्तेश्वर, रामगढ़, पंगोठ, अल्मोड़ा व पिथौरागढ़ समेत कई अन्य हिमालय क्षेत्र वायु प्रदूषण की चपेट में है। पीएम 2.5 के साथ पीएम 10 की मात्रा में भी वृद्धि हुई है। यदि ठीकठाक बारिश नहीं हुई तो वायु प्रदूषण में अधिक वृद्धि होगी।
अभी तक सामान्य से 5 डिग्री अधिक रहा तापमान
नैनीताल: डा नरेंद्र सिंह के अनुसार इस बार शीतकाल में बारिश व बर्फबारी में कमी से नमी की मात्रा में बेहद कमी रही। जिस कारण कुमाऊं के पर्वतीय क्षेत्रों में तापमान सामान्य से 4- 5 डिग्री सेल्सियस तक उठे रहे। जिस कारण ठंड उतनी नहीं और दिन के समय गर्मी का एहसास रहा। जिसके चलते मार्च व अप्रैल वायु प्रदूषण की गिरफ्त में रहने लगे।
जलवायु परिवर्तन को बढ़ावा देंगे ये हालात
नैनीताल: डा नरेंद्र सिंह के अनुसार वातावरण के ये हालात जलवायु परिवर्तन को बढ़ावा देंगे। साथ ही तापमान की दर में भी वृद्धि करेंगे, जो ग्लोबल वार्मिंग के लिहाज से कतई उचित नहीं होगा। इस पर अंकुश बेहद जरूरी है। समय रहते हल तलाशने होंगे।
मार्च अप्रैल में 20 से 25 के बीच रहता है पीएम 2.5
नैनीताल: नैनीताल में पीएम 2.5 की मात्रा 20 से 25 पीजीएम रहती है, जबकि मई व जून में इसकी मात्रा में वृद्धि होती है, जो कभी कभार ही 50 से 100 पीजीएम तक पहुंच पाती है। ग्रीष्मकालीन पर्यटन सीजन के पीक दिनों में वाहनों की संख्या में अधिक वृद्धि के साथ जंगलों की आग के कारण वायु प्रदूषण सामान्य से चार गुना तक बढ़ जाता है।

