सोनभद्र। करीब 15 वर्ष साल पहले नक्सली रामवृक्ष की हत्या के मामले में गुरुवार को अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम जितेंद्र कुमार द्विवेदी की कोर्ट ने कुख्यात नक्सली मुन्ना विश्वकर्मा व अजीत कोल को उम्रकैद की सजा सुनाई। कोर्ट में नक्सली मुन्ना की भभुआ जेल से वर्चुअल माध्यम से पेशी हुई।
इससे पहले भी मुन्ना व अजीत को आयुध अधिनियम के तहत पिछले साल फरवरी में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। अभियोजन के मुताबिक ब्रह्मोरी निवासी अजय पासवान ने तीन दिसंबर 2009 को कोन थानाध्यक्ष को तहरीर देकर बताया था कि वह चौकीदार सरयू पासवान का बेटा है। एक दिसंबर की रात जंगल में नक्सलियों के दो गुटों के बीच लेवी वसूली को लेकर फायरिंग हुई। इसमें एक नक्सली के मारे जाने की सूचना मिली। डर के कारण वह वहां नहीं गया।
पुलिस ने तहरीर के आधार पर अज्ञात लोगों पर केस दर्ज कर मामले की विवेचना शुरू की। घटनास्थल से नक्सली रामवृक्ष का शव बरामद किया गया। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। विवेचना के दौरान नक्सली मुन्ना विश्वकर्मा उर्फ विद्रोही, सोनभद्र के राबर्ट्सगंज निवासी रामवृक्ष, चंदौली के नौगढ़ के अजीत कोल उर्फ बब्बल का नाम प्रकाश में आया। विवेचक ने कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की।
अदालत ने गवाहों के बयान व साक्ष्य के आधार पर मुन्ना विश्वकर्मा व अजीत कोल को उम्रकैद की सजा सुनाई। अभियोजन की ओर से अपर जिला शासकीय अधिवक्ता विनोद कुमार पाठक ने बहस की। दोनों नक्सलियों पर 20-20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। अर्थदंड न देने पर चार-चार माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। सुनवाई के दौरान जेल में बिताई गई अवधि सजा में समाहित होगी।

