युद्धवीर सिंह मांगे माफी, वैश्य समाज का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा : अभिषेक गोयल

मुज़फ्फरनगर:खतौली। अखिल भारतीय वैश्य महासंगठन के खतौली नगर अध्यक्ष अभिषेक गोयल (एडवोकेट) ने अखिल भारतीय जाट महासभा के राष्ट्रीय महासचिव युद्धवीर सिंह के विवादित बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने इसे समस्त वैश्य समाज का अपमान बताते हुए सार्वजनिक रूप से माफी की मांग की है। दरअसल, दो दिन पूर्व सिसौली में जाट महासभा द्वारा आयोजित जाट महापंचायत के दौरान चौधरी युद्धवीर सिंह ने मीडिया से बातचीत में वैश्य समाज को लेकर विवादित बयान दिया था, जिसकी वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। वीडियो में वह कहते नजर आ रहे हैं कि चोर और ठग मंदिर जाते थे, मंदिरों का निर्माण वही करवाते थे, जिनके पास अवैध धन होता था। उन्होंने वैश्य समाज पर कटाक्ष करते हुए कहा कि गांव को लूटने वाले लोग मंदिर और धर्मशाला में दान देते थे। युद्धवीर सिंह इससे पहले भी कई विवादास्पद बयान दे चुके हैं। 5 मार्च 2023 को जयपुर में आयोजित जाट महाकुंभ में भी उन्होंने मंदिरों और ब्राह्मण समाज को लेकर अपमानजनक टिप्पणी की थी। उन्होंने ब्राह्मणों पर लोगों को धोखा देने का आरोप लगाते हुए धार्मिक परंपराओं को ढोंग और पाखंड करार दिया था।

अखिल भारतीय वैश्य महासंगठन के नगर अध्यक्ष अभिषेक गोयल ने कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि आजादी के बाद से देश के विकास में वैश्य समाज ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। छोटे-बड़े व्यवसाय और उद्योगों के जरिए लाखों लोगों को रोजगार प्रदान किया है और देश की अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाया है। वैश्य समाज सरकार को सबसे अधिक कर (टैक्स) अदा कर देश की प्रगति में योगदान दे रहा है।

अभिषेक गोयल ने कहा कि चौधरी युद्धवीर सिंह मेहनत में विश्वास रखने की बात कहते हैं, लेकिन दूसरी ओर आरक्षण की मांग करते हैं। यदि वे परिश्रम पर भरोसा करते हैं तो उन्हें आरक्षण की जरूरत क्यों पड़ती है?

उन्होंने कहा कि किसी भी धर्म को मानना हर व्यक्ति की अपनी आस्था का विषय है, और इस तरह की बयानबाजी से किसी की धार्मिक भावनाओं को आहत करना अनुचित है। उन्होंने मांग की कि युद्धवीर सिंह सार्वजनिक रूप से ब्राह्मण और वैश्य समाज से माफी मांगे। यदि ऐसा नहीं किया गया तो वैश्य समाज जल्द ही उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *