वर्ष 2024 में रसूलपुर चकिया निवासी राजू सिंह ने एसबीआई के अधिकारियों से शिकायत की थी। बताया था कि उसने शाखा में दो एफडी में रकम जमा की थी। बिना जानकारी दिए ही उनकी तीन लाख की एफडी तोड़ दी गई। पूरी रकम पंकज मणि त्रिपाठी के खाते में ट्रांसफर कर दिया गया। जबकि एफडी की मूल प्रति उनके पास है। बैंक अधिकारियों की जांच में आरोप सही पाया गया।
पेशकार का जमानत प्रार्थनापत्र निरस्त
रिश्वत लेने के आरोपित व कैंपियरगंज तहसील में तैनात तत्कालीन पेशकर अरविंद कुमार श्रीवास्तव का जमानत प्रार्थनापत्र विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम ओमकार शुक्ल ने निरस्त कर दिया। अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक घनश्याम त्रिपाठी का कहना था कि शिकायतकर्ता सुबाष सिंह पीपीगंज थाना क्षेत्र के गागपार का निवासी है।
24 जनवरी, 2025 को उसने एक शिकायती प्रार्थनापत्र भ्रष्टाचार निवारण संगठन गोरखपुर इकाई को दिया, जिसमें बताया कि उसके ससुर रामनवल की मृत्यु 28 सितंबर, 2014 को हो चुकी है और उन्हें दो बेटियां थीं। इस लिहाज से संपूर्ण संपत्ति की वारिस बेटी अमरावती और कमलावती हुईं।
शिकायतकर्ता की पत्नी के चाचा आदि लोगों ने जालसाजी कर संपत्ति को अपने नाम वरासत करा लिया। इस संबंध में शिकायतकर्ता ने वर्ष 2014 में ही न्यायालय तहसीलदार कैंपियरगंज में वाद दाखिल किया है। 12 दिसंबर, 2024 से न्यायालय द्वारा आदेश सुरक्षित है। उसी मुकदमे में आदेश कराने के नाम पर न्यायालय के आरोपित पेशकार ने शिकायतकर्ता से दो लाख रुपये रिश्वत की मांग की।

