एटा। दारोगा के संगीन आरोपों से घेरे में आए जिला जेल के जेलर सोमवार को फिर आरोपों में घिर गए। शाम को जेलर आवास पर आगरा से पहुंची महिला ने शारीरिक शोषण के आरोप लगाकर जमकर हंगामा काटा।
इसके बाद जेलर से हाथापाई की। बचने के लिए जेलर आवास में छुपे रहे। महिला का आरोप है कि जेलर कई लड़कियों की जिंदगी बर्बाद कर चुका है। अब उसे गाड़ी से कुचलने की धमकी दी जा रही है।
जेलर के आवास पर सोमवार शाम पांच बजे अपना चेहरा ढके हुए एक महिला पहुंची और आवास के गेट पर पहले सुरक्षाकर्मियों से भिड़ गई। महिला का कहना था कि जेलर प्रदीप कश्यप की गोरखपुर व आगरा में तैनाती के दौरान वह उनके साथ रही। हंगामे के दौरान महिला जेलर के कमरे में घुसने लगी तो की कोशिश तो एक सिपाही ने उसे रोकने की कोशिश की, लेकिन वह खींचतान कर अंदर दाखिल हो गई।
जेलर कमरे से बाहर निकले और दोनों के बीच हाथापाई हो गई। 15 मिनट तक हंगामा चलता रहा और जेलर ने आवास में घुसने के बाद दरवाजा बंद कर लिया। इसके बाद महिला आवास से बाहर निकली। इसके बाद जेलर को सुरक्षा कर्मियों ने कमरे से निकाला और कारागार के गेट तक लेकर गए।

11 वर्ष से उनकी पत्नी साथ नहीं रह रही

हंगामे की सूचना पर मीडियाकर्मी पहुंच गए। महिला का आरोप है कि तीन वर्ष पूर्व जेलर ने उससे कहा था कि 11 वर्ष से उनकी पत्नी साथ नहीं रह रही, इसलिए अब जो कुछ हो तुम ही हो। बाद में जेलर अपने वायदे से मुकर गए। महिला का कहना था कि उसने डीजी जेल और डीआइजी जेल से एक सप्ताह पूर्व फोन पर शिकायत की थी।

लिखित में शिकायत दें

डीजी जेल की तरफ से कहा गया कि लिखित में शिकायत दें। महिला ने कहा कि पूरे प्रकरण के बारे में उच्च अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। महिला के अनुसार वह फिलहाल आगरा में रह रही है। उसे जेलर से जान का खतरा है। वह गाड़ी से कुचलकर मरवाने की धमकी दे चुका है। एक बार मारने के लिए एक युवक को पीछे लगा दिया था, लेकिन वह बच गई। जेलर का पक्ष जानने की कोशिश की, लेकिन कुछ भी कहने से इन्कार कर दिया।

वीडियो प्रसारित करने वाला दारोगा कासगंज से सम्बद्ध

पिछले महीने जेल में तैनात दारोगा राजीव कुमार ने वीडियो प्रसारित कर जेलर पर उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। आरोप में यह भी कहा था कि छुट्टी देने के लिए लड़कियों की मांग करते हैं। यह वीडियो खूब प्रसारित हुआ। डीआइजी जेल ने आगरा जेल के अधीक्षक को जांच के लिए एटा भेजा था। रिपोर्ट डीआइजी को सौंप दी थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि दारोगा कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं करा सका। दारोगा को दोषी मानते हुए कासगंज जेल से सम्बद्ध कर दिया गया।

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