वाराणसी। नगर निगम की टीम ने मंगलवार को कज्जाकपुरा स्थित गंगा नगर कालोनी में झुग्गी-झोपड़ी व अस्थायी निर्माण ध्वस्त कर दिए। इसमें निगम की टीम को विरोध का भी सामना करना पड़ा। वाल्मीकि समुदाय से बस्ती खाली होने के बाद अब आदमपुर जोन कार्यालय के पास गंगा नगर कालोनी में यूनिटी माल निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो गया।
कज्जाकपुरा सड़क के किनारे वाल्मीकि समुदाय के करीब 40 परिवार 20 वर्षों से रह रहे थे। सड़क से हटाने पर वाल्मीकि समुदाय के सफाईकर्मियों ने कज्जाकपुरा स्थित गंगा नगर कालोनी में कब्जा जमा लिया था। निगम ने बस्ती खाली करने की नोटिस भी दी, लेकिन सफाई कर्मी इसमें हीलाहवाली कर रहे थे। इसे देखते हुए सहायक नगर आयुक्त अनिल यादव के नेतृत्व में निगम की टीम बुलडोजर के साथ सुबह 11.30 बजे कज्जाकपुरा पहुंची। स्थायी व अस्थायी सभी निर्माण पूरी तरह से ध्वस्त कर दिए।

बनेगा बनारस का पहला यूनिटी माल, मिलेगा हस्तल्शिप को बढ़ावा

हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनारस में पहला यूनिटी माल कज्जाकपुरा में प्रस्तावित है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग विभाग 5733 वर्गमीटर में इसका निर्माण कराएगा।

संचालन एमएसएमई व नगर निगम संयुक्त रूप से करेंगे। इस माल में देशभर के हस्तशिल्प और पारंपरिक वस्त्रों का प्रदर्शन और बिक्री की जाएगी। इसमें प्रदेश के वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट योजना के तहत वाराणसी के बुनकरों और शिल्पकारों के उत्पादों को विशेष स्थान दिया जाएगा। मेक इन इंडिया अभियान को प्रोत्साहित करने के लिए स्थानीय स्तर पर निर्मित वस्त्र और अन्य उत्पादों के शो-रूम बनाए जाएंगे।

आइजीआरएस की रैंकिंग में वाराणसी मंडल प्रदेश में अव्व

लोक शिकायत निवारण प्रणाली की जनवरी माह की जारी रैंकिंग में वाराणसी मंडल अव्वल रहा। जनता की शिकायतों का समय से समाधान करने के कारण मंडल को यह उपलब्धि हासिल हुई है। कमिश्नर कौशलराज शर्मा ने बताया कि आइजीआरएस पोर्टल पर आने वाले संदर्भों का निस्तारण प्रदेश सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

शासन की मंशा के अनुरूप जनता की शिकायतों का त्वरित निस्तारण गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध तरीके से करने के लिए एक प्रारूप बनाया गया है। इस प्रारूप को पूरे मंडल में प्रभावी किया गया। इस वजह से शिकायतों की आख्याओं की गुणवत्ता बेहतर हुई है। इसके साथ ही मंडल के जिम्मेदार जनपदीय अधिकारियों की बैठक में शिकायतों के निस्तारण को लेकर कठोर रुख अपनाया गया। बारबार सुधार करने को कहा गया।

ऑनलाइन पोर्टल पर सतत मॉनीटरिंग की गई। यह सुनिश्चित किया गया कि पोर्टल पर प्रतिदिन सुबह 11 बजे तक तथा शाम 6 बजे तक लंबित प्रकरणों की संख्या शून्य हो। जांच के दौरान जो शिकायती पत्र निस्तारण योग्य नहीं पाया गया, उन प्रकरणों को आख्या प्राप्ति के कुछ ही घंटों भीतर अनुमोदित कर दिया गया। निस्तारण योग्य शिकायतों को तत्काल उसी दिन आख्या पोर्टल पर वापस जांचकर्ता अधिकारी को प्रेषित किया गया ताकि दोबारा जांच कर प्रभावी निस्तारण किया जाए।

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