भारत में पुलिस बहुत साहसी है,लेकिन कभी-कभी यह साहस जानलेवा बन जाता है जैसे जनपद मेरठ के ग्राम मसूरी के निवासी एक बहादुर पुलिस इंस्पेक्टर सुनील कुमार शहीद हो गये है।इस पुलिस मुठभेड़ में चार अपराधी भी मारे गए है।
यह बेहद दुखद घटना है। ईश्वर पुण्य आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान दें और इस दुःख की घड़ी में परिवारजनों को कष्ट सहन करने की शक्ति प्रदान करें।
हमारे देश में पुलिस को उच्च स्तर की ट्रेनिंग की आवश्यकता है। पुलिस को स्थिर टारगेट, मूविंग टारगेट और भागते वाहन का पीछा करने के दौरान अपराधियों को पकड़ने के लिए कैसे फायरिंग की जानी चाहिए आदि कार्यों की विशेष ट्रेनिंग की आवश्यकता है।
पुलिसबल में भारी हथियारों से लैस अपराधियों को पकड़ने की टीम अलग होनी चाहिए। इस टीम के पास हमलों के लिए राइफलें, टामी बंदूकें, शॉटगंस, कारबाइनें, अचेत करने वाले हथगोले और घात में बैठकर निशाना साधने वालों को मारने के लिए उच्च क्षमता वाले हथियार होने चाहिए।
देश के सभी पुलिस थानों मे कम से कम पांच ऐसे ट्रेंड निशानेबाज होने चाहिए, जो शातिर अपराधियों की गिरफ्तारी के समय, मुठभेड़ के समय, नाकाबंदी तोड़कर भागते अपराधियों की गिरफ्तारी के समय व् अपराधियों के वाहनों का पीछा करने के दौरान और आपात स्थिति में हथियारों (इंसास और एसएलआर)का प्रभावशाली तरीके से इस्तेमाल कर सके।
बड़े अपराधी और गैंगस्टर अत्याधुनिक हथियारों से लैस होते हैं, इसलिए इस तरह के अपराधियों से निपटने के लिए पुलिस को कमांडो की टीम बुलानी चाहिए।
पुलिस की क्राइम ब्रांच में क्रिमिनल प्रोफाइलिंग पर काम करने के लिए डिटेक्टिव भी होने चाहिए। जर्मनी में 1980 के दशक में हाराल्ड डेर्न ने अपराधियों को श्रेणी में बांटने का तरीका विकसित किया था।इसे क्रिमिनल प्रोफाइलिंग कहते हैं।भारत में भी इसपर अधिक जोर दिया जाना चाहिए।वीरगति प्राप्त इस योद्धा को हम नमन करते है।

