अयोध्या। अगले कुछ महीनों में जब आप रामनगरी का भ्रमण करने पहुंचेंगे तो यहां पर आपका रोम-रोम राम-राम कहता हुआ मिलेगा। ऐसा इसलिए क्‍याेंक‍ि अयोध्या के कण-कण में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की व्याप्ति के लिए उनके जीवन से जुड़े विविध प्रसंगों का चित्रण कराया जा रहा है। लखनऊ-गोरखपुर राष्ट्रीय राजमार्ग से रामनगरी की ओर आने वाले धर्मपथ पर तो पग-पग विभिन्न प्रकार के म्यूरल्स बनवाए ही जा रहे हैं।
वहीं राम मंदिर और रामजन्मभूमि परिसर में भी दर्शनार्थियों के मनोमस्तिष्क को राममय करने के विभिन्न यत्न किए जा रहे हैं। लगभग 70 एकड़ के रामजन्मभूमि परिसर को एक सूत्र में बांधने के लिए निर्माणाधीन 800 मीटर के परकोटे में जहां कांस्य धातु के 80 म्यूरल्स लगवाए जा रहे हैं तो राम मंदिर के भूतल की वाह्य दीवारों पर 85 म्यूरल्स लगाए जा रहे हैं।

रामायण के श्लोक पढ़ सकेंगे भक्‍त

परकोटे के म्यूरल्स जहां रामकथा का बखान करते दिखेंगे तो राम मंदिर की बाहरी दीवारों पर लगने वाले म्यूरल्स पर महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण के श्लोक और इनके भावार्थ का उद्धरण करेंगे। परकोटे के म्यूरल्स तो इसके पूर्णरूपेण निर्माण के बाद ही लग सकेंगे, लेकिन राम मंदिर के म्यूरल्स लगने शुरू हो गए हैं।

म्‍यूरल्‍स पर हो रहा है काम

इसी तरह धर्मपथ पर बनाए जा रहे बड़े-बड़े म्यूरल्स में भी भगवान श्रीराम व उनके अनन्य भक्त हनुमानजी से जुड़े विभिन्न प्रसंगों का उद्धरण किया जा रहा है। कई भित्तिचित्र बनाए जा चुके हैं तो कुछ पर कलाकार कार्य करते दिखते हैं।

200 म्‍यूरल्‍स लगाए जाएंगे

पिछले दिनों राम मंदिर निर्माण समिति की बैठक में हिस्सा लेने पहुंचे अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने कहा था क‍ि ‘पूरे रामजन्मभूमि परिसर में लगने वाले लगभग 200 म्यूरल्स इसलिए लग रहे हैं, जिससे यहां दर्शन के निमित्त आने वाले दर्शनार्थियों को उनके आराध्य के जीवन प्रसंगों से जुड़ी जानकारी दी जा सके।

अच्‍छे आचरण को क‍िया जा सकेगा प्रेर‍ित

इसके अलावा उन्‍होंने कहा था क‍ि म्‍यूरल्‍स से भक्‍तगण इससे भी अवगत हो सकेंगे कि भगवान राम किन आदर्शों व मूल्यों के कारण मर्यादा पुरुषोत्तम बन सके। म्यूरल्स लगाने की योजना के पीछे का उद्देश्य यही है कि यहां आने वाले राम भक्तों को अच्छे आचरण के लिए प्रेरित किया जा सके।

आपको बता दें क‍ि यह पहल न केवल श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक अनुभव को समृद्ध बनाएगी, बल्कि अयोध्या को वैश्विक स्तर पर एक सांस्कृतिक और पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करने में भी मददगार साबित होगी।

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