डॉक्टरों ने घोषित कर दिया था मृत
पड़ोसियों की सलाह पर रामलखन को अस्पताल ले गया तो वहां डॉक्टर ने भी चेकअप कर मृत बताया। परिवार के लोगों ने भर्ती कर इलाज और ऑक्सीजन मास्क लगाने का दबाव बनाया। तकरीबन डेढ़ घंटे बाद बुजुर्ग की सांस चलने लगी। फिर वह बेड पर बैठ गए। इस पर परिवार के लोगों के साथ ही अस्पताल का स्टाफ भी स्तब्ध रह गया, क्योंकि सबने उम्मीद छोड़ दी थी।
रामलखन को मान लिया गया था मुर्दा
रामलखन को मुर्दा मान लिया गया था। मौत के बाद जीवित होने की खबर फैलने पर अब रामलखन को देखने के लिए रिश्तेदारों के साथ ही अन्य लोग भी पहुंच रहे हैं। मजदूरी करने वाले रामलखन के साथ उनकी पत्नी जगरानी, दो बेटे मुन्नालाल और बेनी प्रसाद रहते हैं।
बहू ने कहा- ये तो ईश्वरीय कृपा है…
मृत घोषित करने के बाद जीवन मिलने पर रामलखन कई तरह के किस्से लोगों को सुना रहे हैं। उनकी बड़ी बहू आशा देवी का कहना है कि यह ईश्वरीय कृपा है। हम लोग रोने लगे थे। मौत की खबर सुनकर बेटियां और बहनें आ गई थीं। मृत बताने के डेढ़ घंटे बाद जीवित होना ईश्वर की कृपा है।
पत्नी ने कहा- ऐसे जीवित होना एक तरह से दोबारा जन्म होना है
पत्नी जगरानी भी कहती हैं कि उनके सामने वह गिरे थे। सांस बंद हो गई थी। दोबारा सांस चलना और जीवित होना एक तरह से दोबारा जन्म होना है।

