देहरादून। जनपद देहरादून में फार्मास्युटिकल और इलेक्ट्रानिक्स उद्योग लगाने में उद्यमी अधिक रूचि ले रहे हैं। नवंबर 2024 तक देहरादून में सूक्ष्य, लघु और मध्यम उद्यम, के 9,166 उद्योग उत्पादन से जुड़ी हैं। जिसमें 1,907.97 करोड़ का निवेश हुआ है। इन उद्योगों में 3,112 उद्योग फार्मा और इलेक्ट्रानिक्स उपकरण उत्पादन से जुड़े हैं।
इसके अतिरिक्त वर्ष 2023 के वैश्विक निवेशक सम्मेलन के दौरान जिन 52 बड़े घरानों ने अपने संस्थान और उद्योगों को स्थापित करने में रुचि दिखाई उसमें भी फार्मास्युटिकल और इलेक्ट्रानिक्स उद्योग अधिक हैं। यह 52 उद्योग 4,375.51 करोड़ का निवेश कर रहे हैं। सभी सभी कंपनियां मध्यम और बड़े श्रेणी के उद्योग हैं।
इसके अलावा जनपद में सर्विस सेक्टर से अधिक और प्रोडक्शन सेक्टर की इकाई अधिक हैं। देहरादून जनपद में 52 नये स्थापित होने वाले उद्योग में 35 फार्मास्युटिकल, इलेक्ट्रानिक, इलेक्ट्रीकल्स से संबद्ध। हैं। इसके अलावा कृषि उपकरण, खाद एवं बीच उद्योग, स्टील उद्योग, प्लास्टिक वस्तु निर्माता उद्योग, रेडीमेट गारमेंट्स, कागज उद्योग, लकड़ी के फर्नीचर उद्योग आदि शामिल हैं। यह सभी उत्पादन इकाई है। जबकि 18 सेवा क्षेत्र की इकाई है जिनमें होटल, होम स्टे, उच्च शिक्षा सस्थान, हास्पीटल आदि शामिल हैं।

19 उद्योग करेंगे ग्राउंडिंग होगा 2512 करोड़ का निवेश

वर्ष 2023 के वैश्विक निवेशक सम्मेलन के दौरान जिन 71 उद्यमियों ने देहरादून जनपद में अपने उद्योग लगाने के लिए सरकार के साथ एमओयू किया था उनमें से 19 औद्योगिक घराने अगले छह महीने में अपनी उद्योग लगाने की कार्रवाई प्रारंभ कर देंगे। इन उद्योगों पर 2,512 करोड़ रुपये का निवेश होगा। यानी अभी तक देहरादून जनपद में 6283.48 करोड़ का निवेश हो चुका है।

लैंड बैंक बने तो और अधिक उद्योग होंगे दून में स्थापित

उद्यमियों का कहना है कि सरकार यदि उद्योगों के लिए जनपद मेें लैड बैंक बनाए जो देश-विदेश के कई औद्योगिक घराने उत्तराखंड में निवेश के लिए आकर्षित हो सकते हैं। इंडस्ट्रीज एसोसिएशन आफ उत्तराखड के अध्यक्ष पंकज गुप्ता कहते हैं कि देहरादून जनपद में नये उद्योग लगाने और पुराने उद्योगों के विस्तार के लिए भूमि की नितांत जरूरत है।
इस बार में उद्यमी कई बार मामले काे सरकार के समक्ष उठा चुके हैं। यहां बेहतर कानून व्यवस्था और पर्यावरण की दष्टि से अनुकूल मौसम होने के कारण यहां औद्योगिक निवेश के लिए बेहतर माहौल है। लेकिन सरकार की ओर से कहीं भी जमीन चिल्हित नहीं की जा रही है।

सिडकुल व्यवसासिक कंपनी के रूप में कर रहा कार्य

उत्तराखंड इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष सुनील उनियाल कहते हैं कि सिडकुल की स्थापना इसलिए की गई थी कि वह औद्योगिक क्षेत्र विकसित करे और उद्योगों को भूमि आवंटित कराएं। लेकिन सिडकुल निजी कंपनी की तर्ज पर मुनाफे के लिए कार्य कर रही है।

सिडकुल बिड के माध्यम से इंडस्ट्रीयल प्लाट आवंटित कर रहा है तो उद्यमी प्वाट की ऊंची बोली लगाएगा उसे ही प्लाट आवंटित होता। जबकि उद्यमी निवेश करने इसलिए आते हैं कि उन्हें बेकार और बंजर भूमि कम दरों पर मिले ताकि वह निवेश कर अधिक से अधिक रोजगार के अवसर सृजित करें।
देहरादून जिला उद्योग केंद्र के प्रबंधक एके बडोनी ने कहा कि जिला उद्योग केंद्र में पिछले 24 सालों से निरंतर एमएसएमई से संबंद्ध उद्योग स्थापित करने के लिए उद्योगपति पंजीकरण करते और उसके बाद उद्योग स्थापित करते हैं। अधिकांश उद्योग निजी भूमि पर स्थापित हैं। सरकार के पास भूमि सीमित है जो समय-समय पर उद्यमियों को आवंटित कर दी जाती है। वैश्विक निवेशक सम्मेलन में जनपद उद्योगों ने सरकार के साथ एमओयू किया उसके शत प्रतिशत ग्राउंडिंग की जा रही है।

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