देवबंदी उलेमा बोले मदरसों को फंडिंग की ही जांच क्यों,मुसलमानों की खून और पसीने की कमाई से चलते हैं मदरसे
प्रशांत त्यागी, देवबंद।
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा मदरसों की फंडिंग की जांच के लिए गठित की गई कमेटी के मामले में देवबंदी उलेमाओ ने कड़ा एतराज जताया है, मदरसा दारुल उलूम अशरफिया देवबंद के प्रबंधक मौलाना मुफ्ती सलीम कासमी ने कहा राज्य सरकार के लिए मदरसों के दरवाजे हर समय खुले हुए हैं, लेकिन जिस प्रकार से राज्य सरकार मदरसों को टारगेट कर रही है वह सरासर गलत है। देश के अंदर जितने भी मदरसे हैं उन सब का प्रतिनिधित्व देवबंद दारुल उलूम करता है, दारुल उलूम या देश का कोई भी मदरसा राज्य सरकार, उद्योगपति या अन्य किसी भी देश की सरकार से कोई आर्थिक सहायता नहीं लेता। जो भारतीय मुस्लिम विदेश में रहकर नौकरी करते हैं वह अपनी नौकरी का कुछ हिस्सा मदरसों की मस्जिदों को चंदा देते हैं, जिसे सरकार विदेशी फंडिंग समझती है। मौलाना मुफ्ती सलीम कासमी ने बताया की सरकार जिस प्रकार से इस्लामिक मदरसो को लेकर देश के अंदर एक अलग तरीके का माहौल पैदा कर रही है वह कहीं तक भी जायज नहीं है, उन्होंने कहा कि सरकार मदरसों की जांच करा ले वह उसके लिए तैयार हैं , मदरसों को मिलने वाले चंदे का पूरा हिसाब रसीद बुक के माध्यम से सभी मदरसों के पास सुरक्षित है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि जब सरकार मदरसों की जांच कर रही है तो अन्य धर्म के शिक्षण संस्थानों की जांच क्यों नहीं कराई जाती? यह भेदभाव है जिसे देश की जनता देख रही है।

