“आरक्षण का आधार जाति या आर्थिक स्थिति नहीं, योग्यता, प्रतिभा और मेहनत हो” — ठा. अमरीश राणा
राजसत्ता पोस्ट|असलम त्यागी
मुजफ्फरनगर जनपद के विकास खण्ड चरथावल क्षेत्र के बिरालसी निवासी और किसान स्वाभिमान एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठा. अमरीश राणा ने आरक्षण व्यवस्था को लेकर अपनी राय रखते हुए कहा कि आरक्षण का आधार न तो जाति होना चाहिए और न ही आर्थिक स्थिति। उन्होंने कहा कि देश में सभी के लिए समान आधार योग्यता, प्रतिभा और मेहनत होना चाहिए।
अमरीश राणा ने कहा कि वर्तमान जातिगत आरक्षण व्यवस्था समाज में विभाजन की भावना को बढ़ावा देती है। उनका कहना है कि एक ही कक्षा में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए अलग-अलग मानदंड होने से योग्यता और प्रतिस्पर्धा प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि आरक्षण व्यवस्था को लेकर समाज में लंबे समय से बहस चल रही है और इस पर गंभीरता से विचार किए जाने की आवश्यकता है।
उन्होंने आर्थिक आधार पर आरक्षण दिए जाने की संभावित व्यवस्था पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इससे आर्थिक रूप से कमजोर होने का प्रमाण पत्र लेने की प्रवृत्ति बढ़ सकती है। उनका तर्क है कि सरकार को गरीबी दूर करने और जरूरतमंदों को बेहतर शिक्षा एवं सुविधाएं उपलब्ध कराने पर ध्यान देना चाहिए।
किसान स्वाभिमान एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमरीश राणा ने आरक्षण व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त करने की वकालत करते हुए कहा कि देश में अवसरों का आधार योग्यता, प्रतिभा और मेहनत होना चाहिए। उन्होंने कहा कि डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक सहित महत्वपूर्ण क्षेत्रों में योग्य लोगों को आगे आने का अवसर मिलना चाहिए।
उन्होंने सरकार से सभी नागरिकों को समान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर स्कूल तथा समान अवसर उपलब्ध कराने की मांग की। अमरीश राणा ने कहा कि यदि शिक्षा व्यवस्था मजबूत होगी और हर वर्ग के बच्चों को समान सुविधाएं मिलेंगी, तो सामाजिक और आर्थिक पिछड़ेपन को दूर करने में अधिक प्रभावी मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि देश को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिभा और मेहनत को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। साथ ही आरक्षण व्यवस्था पर व्यापक और निष्पक्ष बहस की जरूरत है, ताकि देश में अवसरों की व्यवस्था को लेकर बेहतर नीति तैयार की जा सके।

