पुरकाजी में तिरंगे का जनसैलाब, जहीर फारूकी के नेतृत्व में सूलीवाला बाग तक निकली विशाल तिरंगा यात्रा

मुजफ्फरनगर। 15 अगस्त 2026 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पुरकाजी की सड़कों पर देशभक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिला। हाथों में राष्ट्रीय ध्वज और दिल में देशभक्ति का जज्बा लिए हजारों लोगों का जनसैलाब तिरंगा यात्रा में उमड़ पड़ा। विभिन्न जाति और धर्म के लोग एक ही तिरंगे के नीचे साथ चलते नजर आए।

पुरकाजी नगर पंचायत के चेयरमैन एवं भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय सचिव जहीर फारूकी के नेतृत्व में विशाल तिरंगा यात्रा का आयोजन किया गया। यात्रा पुरकाजी रोडवेज अड्डे से शुरू होकर नगर के प्रमुख मार्गों से गुजरती हुई ऐतिहासिक सूलीवाला बाग पहुंची।

यात्रा शुरू होते ही लोगों का कारवां लगातार बढ़ता गया। युवा, किसान, व्यापारी, सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक हाथों में तिरंगा लेकर यात्रा में शामिल हुए। पूरे रास्ते भारत माता की जय के जयकारों से वातावरण गूंजता रहा।

तिरंगा यात्रा का जगह-जगह लोगों ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। कई स्थानों पर यात्रियों के लिए खाद्य पदार्थ और अन्य सामग्री का वितरण भी किया गया। यात्रा के दौरान सड़कों पर दूर तक तिरंगे ही तिरंगे दिखाई दिए और पूरा पुरकाजी देशभक्ति के रंग में रंगा नजर आया।

जहीर फारूकी के आह्वान पर बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने से तिरंगा यात्रा एक विशाल जनसैलाब में तब्दील हो गई। यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव सूलीवाला बाग रहा, जहां पहुंचकर राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया और स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों को नमन किया गया।

सूलीवाला बाग को शहीद स्थल घोषित करने की मांग

तिरंगा यात्रा के दौरान एक बार फिर लंबे समय से चली आ रही मांग जोर-शोर से उठाई गई कि सूलीवाला बाग को आधिकारिक रूप से शहीद स्थल का दर्जा दिया जाए। इस संबंध में तहसीलदार सदर राधेश्याम गौड़ और नायब तहसीलदार अमित कुमार को ज्ञापन भी सौंपा गया।

स्थानीय लोगों के अनुसार सूलीवाला बाग का इतिहास 1857 के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा हुआ है। प्रकाशित ऐतिहासिक रिपोर्टों में यहां अंग्रेजी शासन के खिलाफ विद्रोह करने वाले सैकड़ों क्रांतिकारियों को फांसी दिए जाने का उल्लेख मिलता है। कुछ रिपोर्टों में करीब 500 क्रांतिकारियों को यहां फांसी दिए जाने की बात सामने आती है, जबकि करीब 74 शहीदों के नाम ऐतिहासिक पुस्तकों में दर्ज होने का उल्लेख भी मिलता है।

यही ऐतिहासिक पृष्ठभूमि सूलीवाला बाग को पुरकाजी और आसपास के क्षेत्र के लोगों के लिए विशेष महत्व देती है। स्थानीय स्तर पर लंबे समय से मांग की जा रही है कि इस स्थान को सरकारी स्तर पर उचित पहचान दिलाकर शहीद स्थल के रूप में विकसित किया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां स्वतंत्रता संग्राम और यहां बलिदान देने वाले क्रांतिकारियों के इतिहास को जान सकें।

वर्षों से जारी है तिरंगा यात्रा की परंपरा

सूलीवाला बाग को शहीद स्थल घोषित कराने की मांग को लेकर जहीर फारूकी लंबे समय से आवाज उठाते रहे हैं। प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक वर्ष 2015 से राष्ट्रीय पर्वों के अवसर पर उनके नेतृत्व में पुरकाजी से सूलीवाला बाग तक तिरंगा यात्राएं निकाली जाती रही हैं।

वर्ष 2024 में भी जहीर फारूकी के नेतृत्व में पुरकाजी से सूलीवाला बाग तक हजारों लोगों की मौजूदगी में तिरंगा यात्रा निकाले जाने और वहां ध्वजारोहण किए जाने की खबरें सामने आई थीं। उस दौरान भी सूलीवाला बाग को शहीद स्थल घोषित करने की मांग प्रमुखता से उठाई गई थी।

जहीर फारूकी की ओर से सूलीवाला बाग को शहीद स्मारक के रूप में विकसित किए जाने की दिशा में प्रयास किए जाने की बात कही जाती रही है। हालांकि इसे आधिकारिक रूप से शहीद स्थल घोषित किए जाने की मांग अभी भी जारी है।

देशभक्ति के साथ इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संदेश

जहीर फारूकी का कहना रहा है कि तिरंगा यात्रा का उद्देश्य केवल स्वतंत्रता दिवस मनाना नहीं है, बल्कि युवाओं और बच्चों में राष्ट्रप्रेम की भावना को मजबूत करना भी है। उनका कहना है कि घरों में बच्चों की शिक्षा-दीक्षा और तरबियत में देशप्रेम की भावना होनी चाहिए तथा उन्हें उन क्रांतिकारियों के संघर्ष और बलिदान के बारे में बताया जाना चाहिए, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना जीवन न्योछावर कर दिया।

तिरंगा यात्रा में अलग-अलग जाति और धर्म के लोग एक साथ शामिल हुए। किसी के हाथ में तिरंगा था तो कोई भारत माता के जयकारे लगा रहा था। इस दौरान एकता, भाईचारे और देशप्रेम का संदेश दिखाई दिया।

अब एक बार फिर सूलीवाला बाग को शहीद स्थल घोषित करने की मांग प्रशासन और शासन के सामने है। राष्ट्रीय पर्वों पर यहां लगातार तिरंगा यात्रा पहुंच रही है, ध्वजारोहण किया जा रहा है और शहीदों को नमन किया जा रहा है। ऐसे में अब देखना होगा कि इस मांग पर सरकार और प्रशासन की ओर से आगे क्या कदम उठाया जाता है।

15 अगस्त 2026 की तिरंगा यात्रा ने एक बार फिर पुरकाजी में देशभक्ति का संदेश दिया और सूलीवाला बाग के ऐतिहासिक महत्व को सामने लाते हुए शहीद स्थल का दर्जा दिए जाने की मांग को मजबूती से उठाया।

तिरंगा केवल हाथ में लहराने वाला राष्ट्रीय ध्वज नहीं, बल्कि देश की एकता, स्वतंत्रता और उन वीरों के बलिदान की पहचान है, जिन्होंने राष्ट्र के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया। पुरकाजी की इस तिरंगा यात्रा ने इसी संदेश को एक बार फिर लोगों तक पहुंचाया।

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