विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर पूर्व मंत्री सुरेश राणा ने विभाजन पीड़ितों के साहस और राष्ट्र निर्माण में योगदान को किया नमन

मुज़फ्फरनगर, 14 अगस्त। विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर शुक्रवार को मुज़फ्फरनगर की गांधी कॉलोनी स्थित गांधी वाटिका में विचार संगोष्ठी एवं श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष सुरेश राणा उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान वर्ष 1947 में भारत विभाजन के समय विस्थापन, हिंसा और असहनीय पीड़ा का सामना करने वाले लाखों परिवारों को श्रद्धापूर्वक याद करते हुए उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

कार्यक्रम का शुभारंभ पूर्व मंत्री एवं प्रदेश उपाध्यक्ष सुरेश राणा, उत्तर प्रदेश सरकार में स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री कपिल देव अग्रवाल, जिला पंचायत अध्यक्ष वीरपाल निर्वाल, पूर्व मंत्री डॉ. संजीव बालियान, जिला प्रभारी सूर्य प्रकाश पाल, भाजपा जिलाध्यक्ष सुधीर सैनी, पूर्व विधायक अशोक कंसल, उमेश मलिक, प्रमोद उटवाल एवं सुनील दर्शन सहित अन्य वरिष्ठ जनप्रतिनिधियों और भाजपा पदाधिकारियों ने दीप प्रज्वलित एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया।

संगोष्ठी के दौरान वक्ताओं ने विभाजन के दौर में देशवासियों द्वारा झेली गई पीड़ा, विस्थापन और संघर्ष को याद किया। वक्ताओं ने कहा कि विभाजन के दौरान लाखों परिवारों को अपना घर-बार, जमीन-जायदाद और प्रियजनों को छोड़कर अनजान स्थानों पर शरण लेनी पड़ी। कठिन परिस्थितियों के बावजूद विभाजन पीड़ित परिवारों ने साहस और मेहनत के साथ अपने जीवन को दोबारा खड़ा किया और देश के सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

अपने संबोधन में पूर्व मंत्री सुरेश राणा ने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस केवल इतिहास की एक त्रासदी को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि उन करोड़ों लोगों के अदम्य साहस, संघर्ष और आत्मबल को नमन करने का दिवस है, जिन्होंने अपार पीड़ा सहने के बावजूद हार नहीं मानी और नए सिरे से अपने जीवन का निर्माण किया।

उन्होंने कहा कि वर्ष 1947 का विभाजन भारतीय इतिहास का अत्यंत दुखद अध्याय है। इस त्रासदी ने लाखों परिवारों को बिखेर दिया और असंख्य लोगों ने अपने घर, भूमि, संपत्ति तथा अपने प्रियजनों को खो दिया। इसके बावजूद विभाजन पीड़ितों ने धैर्य और दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ कठिन परिस्थितियों का सामना किया और राष्ट्र निर्माण में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनका संघर्ष और त्याग आज भी प्रत्येक भारतीय के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

सुरेश राणा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा प्रारंभ किया गया विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस हमें इतिहास की उन त्रासद घटनाओं से सीख लेने का अवसर देता है। हमें इससे सामाजिक सौहार्द, आपसी भाईचारे, राष्ट्रीय एकता और अखंडता को और अधिक मजबूत करने की प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी को संकल्प लेना चाहिए कि समाज में सद्भाव और आपसी विश्वास की भावना को मजबूत करते हुए विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।

कार्यक्रम के दौरान विभाजन की भयावह परिस्थितियों से उबरकर अपने परिश्रम, साहस और दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर देश की प्रगति में योगदान देने वाले विभाजन पीड़ित परिवारों को सम्मानित भी किया गया। इस अवसर पर सुरेश राणा ने कहा कि इन परिवारों का संघर्ष, धैर्य और राष्ट्र के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का अमूल्य स्रोत रहेगा।

संगोष्ठी के उपरांत विभाजन की विभीषिका में अपने परिजनों को खोने वाले परिवारों की स्मृति में मौन श्रद्धांजलि जुलूस निकाला गया। जुलूस में विभाजन प्रभावित परिवारों के सदस्य, भाजपा पदाधिकारी, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में नागरिक शामिल हुए। लोगों ने हाथों में संदेश लिखी तख्तियां लेकर शांतिपूर्वक जुलूस में भाग लिया। इस दौरान पूरे वातावरण में राष्ट्रभक्ति, संवेदना, एकता और सामाजिक समरसता का भाव दिखाई दिया।

कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों एवं नागरिकों ने विभाजन की विभीषिका में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हुए दो मिनट का मौन रखा और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। साथ ही राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का संकल्प लिया।

इस अवसर पर जिलामहामंत्री संजय गर्ग, शरद शर्मा, जिला उपाध्यक्ष श्वेता कौशिक, अंजलि चौधरी, विशाल गर्ग, जिला मंत्री ममता अग्रवाल, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष आंचल तोमर, गीता जैन, सुनील दर्शन, पुरुषोत्तम गौतम, राजीव गुर्जर, विजय शुक्ला, दीपक मित्तल, श्रीमोहन तायल, प्रवीण खेड़ा, अमित शास्त्री, नन्द किशोर पाल, पावन छाबड़ा, प्रेमी छाबड़ा, अमित पटपटिया, राधे वर्मा, रेखा वर्मा, पंकज माहेश्वरी, कुशवेंद्र तोमर सहित बड़ी संख्या में भाजपा पदाधिकारी, कार्यकर्ता, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि एवं नागरिक मौजूद रहे।

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