मुजफ्फरनगर दंगे के दौरान नंगला मंदौड़ पंचायत का केस वापस, मंत्री-सांसद समेत 25 आरोपियों को राहत
सचिन जौहरी/अनुज त्यागी
मुजफ्फरनगर। वर्ष 2013 में मुजफ्फरनगर दंगे के दौरान नंगला मंदौड़ में आयोजित पंचायत से जुड़े मामले में राज्य सरकार के आदेश के बाद बड़ी कानूनी राहत मिली है। सरकारी कार्य में बाधा डालने, रास्ता रोकने और निषेधाज्ञा के उल्लंघन के आरोप में दर्ज मुकदमे को वापस लेने का आदेश विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने जारी किया है।
इस मामले में कौशल विकास राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल, सपा सांसद हरेंद्र मलिक, पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान, पूर्व मंत्री सुरेश राणा, एमएलसी अशोक कटारिया, पूर्व सांसद सोहनवीर सिंह, पूर्व विधायक अशोक कंसल, पूर्व विधायक उमेश मलिक, स्वामी नरसिंहानंद उर्फ दीपक त्यागी, साध्वी प्राची, चेयरमैन श्याम पाल समेत कुल 25 आरोपियों को राहत मिली है।
मामला कवाल कांड के बाद 31 जुलाई 2013 को नंगला मंदौड़ इंटर कॉलेज के मैदान में आयोजित पंचायत से जुड़ा है। पंचायत के दौरान सरकारी कार्य में बाधा डालने, रास्ता रोकने और क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट की धारा 7 के तहत तत्कालीन सिखेड़ा थाना प्रभारी चरण सिंह यादव ने एफआईआर दर्ज कराई थी।
एफआईआर में तत्कालीन भाजपा नेताओं, जनप्रतिनिधियों और अन्य लोगों समेत 22 लोगों को आरोपी बनाया गया था। बाद में मामले में आरोपियों की संख्या बढ़कर 25 हो गई।
शासन की ओर से मुकदमा वापस लेने की अनुमति मिलने के बाद मामला विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट में पहुंचा। विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट के पीठासीन अधिकारी डॉ. देवेंद्र सिंह फौजदार ने मामले में आदेश जारी करते हुए आरोपियों के खिलाफ चल रहे केस को वापस लेने की प्रक्रिया को मंजूरी दे दी।
इस फैसले से मामले में नामजद मंत्री, सांसद, पूर्व मंत्री, पूर्व विधायक और अन्य आरोपियों को बड़ी राहत मिली है। मामला करीब 13 वर्ष पुराना था और लंबे समय से अदालत में विचाराधीन था।
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