रोजगार के लिए रूस गए दो भारतीय युवाओं को कथित तौर पर सेना में भर्ती करने का आरोप, परिजनों में चिंता
राजसत्ता पोस्ट|असलम त्यागी
मुजफ्फरनगर | रोजगार की तलाश में रूस गए मुजफ्फरनगर के दो युवाओं को कथित तौर पर रूसी सेना में भर्ती कर युद्ध क्षेत्र में भेजे जाने का मामला सामने आया है। मामला चरथावल क्षेत्र के बाढ़ और पीपलशाह गांव से जुड़ा है। भारतीय किसान यूनियन (NCR) के अध्यक्ष विकास शर्मा ने दोनों गांवों में पहुंचकर युवाओं के परिजनों से मुलाकात की और उनकी स्थिति की जानकारी ली।
परिजनों के अनुसार, बाढ़ निवासी हिमांशु शर्मा और पीपलशाह निवासी शक्ति पुंडीर रोजगार की तलाश में एजेंट के माध्यम से रूस गए थे। परिवारों का आरोप है कि रूस पहुंचने के बाद परिस्थितियां उनकी उम्मीद के मुताबिक नहीं रहीं। वीजा अवधि समाप्त होने के बाद उन्हें भारत वापस भेजने के बजाय कथित तौर पर रूसी सेना में भर्ती कर दिया गया और युद्ध क्षेत्र में भेजे जाने की बात सामने आई है।
विकास शर्मा ने बताया कि दोनों युवाओं की 30 जुलाई को परिजनों से आखिरी फोन पर बातचीत हुई थी। बातचीत के दौरान युवाओं ने कथित तौर पर अपनी मजबूरी और वहां की परिस्थितियों के बारे में परिजनों को जानकारी दी। इसके बाद से परिवार उनकी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं और लगातार उनकी सकुशल वापसी की उम्मीद कर रहे हैं।
बाढ़ निवासी हिमांशु शर्मा के परिवार की स्थिति को लेकर भी चिंता जताई गई है। बताया गया कि हिमांशु अपने परिवार का इकलौता बेटा है और उसके पिता का कुछ समय पहले निधन हो चुका है। ऐसे में परिवार के सामने बेटे की सुरक्षा और वापसी को लेकर गंभीर चिंता बनी हुई है।
वहीं, पीपलशाह निवासी शक्ति पुंडीर के परिवार में भी उसके रूस में फंसे होने की जानकारी के बाद चिंता का माहौल है। परिजनों ने सरकार से मामले में हस्तक्षेप कर दोनों युवाओं को सुरक्षित भारत वापस लाने की मांग की है।
भाकियू (NCR) अध्यक्ष विकास शर्मा ने प्रधानमंत्री, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और विदेश मंत्रालय से मामले को गंभीरता से लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि भारतीय दूतावास और रूसी अधिकारियों के माध्यम से पूरे मामले की जानकारी जुटाकर युवाओं की सुरक्षित वापसी के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए।
परिजनों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी तरह दोनों युवाओं को सुरक्षित वापस भारत लाना है। मामले में युवाओं की वास्तविक स्थिति और उन्हें रूसी सेना में शामिल किए जाने के आरोपों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित सरकारी एजेंसियों की जांच और विदेश मंत्रालय की जानकारी से ही स्पष्ट हो सकेगी।

