​भाजपा एनजीओ प्रकोष्ठ का बड़ा अभियान: 15 अगस्त से शुरू होगा ‘एक रविवार–एक गांव’ कार्यक्रम ‘एक घंटा–समाज के नाम’ की थीम पर प्रदेशभर में चलाया जाएगा सेवा अभियान

 

राजसत्ता पोस्ट|असलम त्यागी 
“मधु जैन को सौंपी गई प्रदेश अभियान संयोजक की कमान, सेवा और जनभागीदारी पर रहेगा जोर 15 अगस्त 2026 से शुरू होकर अगले स्वतंत्रता दिवस तक पूरे उत्तराखंड के गांवों में पहुंचेगा अभियान”

​देहरादून। स्वतंत्रता दिवस के शुभ अवसर पर भारतीय जनता पार्टी, उत्तराखंड के एनजीओ प्रकोष्ठ द्वारा प्रदेशभर में “एक रविवार–एक गांव, एक घंटा–समाज के नाम” नामक एक व्यापक सामाजिक सेवा अभियान की शुरुआत की जा रही है। इस अभियान के तहत एनजीओ प्रकोष्ठ की टीम प्रत्येक रविवार को किसी एक गांव में पहुंचेगी और ग्रामीणों से संवाद स्थापित करते हुए एक घंटे का निस्वार्थ सामाजिक सेवा कार्य करेगी। यह अभियान 15 अगस्त 2026 से आरंभ होकर अगले स्वतंत्रता दिवस तक पूरे वर्ष निरंतर रूप से चलाया जाएगा।
​अभियान के संबंध में जानकारी देते हुए एनजीओ प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक सुशील बहुगुणा ने बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य कोई बड़ा या खर्चीला आयोजन करना नहीं है, बल्कि ग्रामीण अंचलों तक खुद पहुंचकर ग्रामीणों से सीधा संवाद स्थापित करना है। इसके माध्यम से गांवों की स्थानीय आवश्यकताओं को समझने और अपनी क्षमता के अनुसार छोटे लेकिन अत्यंत उपयोगी सामाजिक कार्य करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
​मधु जैन को मिली अभियान संयोजक की जिम्मेदारी
​इस पूरे अभियान के सफल और सुचारू संचालन के लिए एनजीओ प्रकोष्ठ की प्रदेश सह-संयोजक श्रीमती मधु जैन को “एक रविवार–एक गांव अभियान का प्रदेश संयोजक” नियुक्त किया गया है।
​अपनी नई जिम्मेदारी पर आभार व्यक्त करते हुए मधु जैन ने प्रदेश संगठन एवं एनजीओ प्रकोष्ठ के शीर्ष नेतृत्व का धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि संगठन द्वारा सौंपी गई इस महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को वे पूरी निष्ठा, समर्पण और जिम्मेदारी के साथ निभाएंगी। उन्होंने बताया कि अभियान को उत्तराखंड के अधिक से अधिक गांवों तक पहुंचाने के लिए जिला संयोजकों, सह-संयोजकों, स्थानीय एनजीओ, सामाजिक संस्थाओं और ग्रामवासियों के साथ बेहतर समन्वय बनाकर कार्य किया जाएगा।
​हर रविवार ऐसे रहेगा 1 घंटे का खाका (कार्यक्रम की रूपरेखा):
​गांवों में आयोजित होने वाले इस 1 घंटे के कार्यक्रम को तीन मुख्य भागों में विभाजित किया गया है:
​प्रथम 10 मिनट: ग्रामीणों के साथ संवाद एवं सामाजिक संकल्प।
​अगले 40 मिनट: प्रत्यक्ष सेवा कार्य (गांव की जरूरत के अनुसार स्वच्छता अभियान, पौधारोपण, पारंपरिक जलस्रोतों की सफाई, बुजुर्गों व दिव्यांगों की सहायता, नशामुक्ति जागरूकता आदि)।
​अंतिम 10 मिनट: किए गए कार्य की समीक्षा और अगले रविवार की कार्ययोजना का निर्धारण।
​अभियान के प्रथम नियमित रविवार की थीम “मेरा गांव–मेरी जिम्मेदारी” तय की गई है। प्रदेश संयोजक सुशील बहुगुणा ने कहा, “यदि समाज का हर वर्ग प्रत्येक रविवार को केवल एक घंटा अपने क्षेत्र के लिए समर्पित करे, तो यह छोटे-छोटे प्रयास मिलकर एक बड़े और सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन का आधार बन सकते हैं।”
​अभियान का मुख्य संदेश: “एक रविवार–एक गांव, एक घंटा–समाज के नाम।”

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