क्रिकेट के मैदान से अपराध की दुनिया तक: सत्तू की कहानी का हिंसक अंत

राजसत्ता पोस्ट |असलम त्यागी
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में पुलिस मुठभेड़ में मारे गए 25 हजार रुपये के इनामी बदमाश सतपाल उर्फ सत्तू का जीवन उतार-चढ़ाव, विवादों और अपराध की दुनिया से जुड़ी घटनाओं से भरा रहा। कभी क्रिकेट के मैदान पर अपनी पहचान बनाने वाला यह खिलाड़ी बाद में राजनीति में पहुंचा, लेकिन फिर उसका नाम लगातार आपराधिक गतिविधियों से जुड़ता चला गया। पुलिस मुठभेड़ में मौत के बाद उसका अतीत एक बार फिर चर्चा का विषय बन गया है।
सतपाल उर्फ सत्तू मूल रूप से मुजफ्फरनगर जिले के पचेंडा गांव का निवासी था। हालांकि उसका अधिकांश समय चंडीगढ़ में बीता, जहां उसने खेल और राजनीति दोनों क्षेत्रों में पहचान बनाई। बताया जाता है कि वर्ष 1996 में उसने रणजी ट्रॉफी के मुकाबले खेले थे और भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व स्टार खिलाड़ी युवराज सिंह के साथ भी क्रिकेट खेल चुका था। क्रिकेट जगत में वह तेज गेंदबाज के रूप में जाना जाता था और कई प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन के लिए सम्मानित भी हुआ था।
खेल के बाद सत्तू ने राजनीति में कदम रखा। वर्ष 2007 में वह चंडीगढ़ नगर निगम का पार्षद चुना गया। उस समय उसकी छवि एक उभरते हुए जनप्रतिनिधि और खिलाड़ी की थी। स्थानीय राजनीति में उसकी अच्छी पकड़ मानी जाती थी और लोगों के बीच उसकी पहचान लगातार बढ़ रही थी। लेकिन राजनीति में सक्रिय रहने के दौरान ही उसका नाम आपराधिक मामलों में सामने आने लगा।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 2010 में धागा लदे ट्रक की लूट के मामले में उसका नाम सामने आया। इस घटना को उसके आपराधिक जीवन की शुरुआत माना जाता है। इसके बाद वह लगातार विभिन्न मामलों में घिरता चला गया। गिरफ्तारी के बाद उसे जेल भेजा गया और कई वर्षों तक वह जेल में रहा। बताया जाता है कि वर्ष 2011 से 2022 तक वह अलग-अलग मामलों में जेल में बंद रहा।
जेल के दौरान उसका संपर्क मुंबई के कुख्यात छोटा राजन गैंग से हुआ। पुलिस सूत्रों के अनुसार जेल में रहते हुए भी उसने आपराधिक नेटवर्क विकसित किया और कई लोगों से संबंध बनाए। आरोप है कि जेल के भीतर से ही वह कई गतिविधियों का संचालन करता था। इसी दौरान उसकी पहचान एक संगठित अपराधी के रूप में बनने लगी।
पुलिस के अनुसार जेल से बाहर आने के बाद उसने अपनी पत्नी के कथित प्रेमी की हत्या कर दी। इस मामले में उसे गिरफ्तार कर लुधियाना जेल भेजा गया था। बताया जाता है कि जेल में रहते हुए उसने कैंटीन का ठेका भी लिया था और वहां उसका अच्छा-खासा प्रभाव था। कई बार बीमारी का बहाना बनाकर अस्पताल जाने की भी चर्चा रही।
6 फरवरी 2026 को वह पुलिस अभिरक्षा से फरार हो गया। इसके बाद पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश पुलिस उसकी तलाश में जुट गई। फरारी के दौरान उसके खिलाफ कई गंभीर आरोप सामने आए। पुलिस का दावा है कि वह खुद को फौजी या सेना से जुड़ा व्यक्ति बताकर लोगों को नौकरी दिलाने का झांसा देता था। इसी बहाने वह परिवारों से संपर्क बनाता और युवतियों तथा किशोरियों को अपने जाल में फंसाने की कोशिश करता था।
मुजफ्फरनगर पुलिस के अनुसार 19 जून को तितावी क्षेत्र से एक किशोरी के अपहरण के मामले में भी उसका नाम सामने आया था। इसके बाद पुलिस ने उसकी तलाश तेज कर दी थी। एसपी सिटी अमृत जैन के अनुसार सत्तू रेलवे स्टेशन, बस अड्डों और सार्वजनिक स्थानों पर लोगों से संपर्क करता था और नौकरी दिलाने का लालच देकर विश्वास जीतने का प्रयास करता था।
पुलिस का दावा है कि फरारी के दौरान उसने कई राज्यों में अपनी गतिविधियां जारी रखीं। उसके खिलाफ अपहरण, हत्या, रंगदारी, लूट और अन्य गंभीर अपराधों के मुकदमे दर्ज बताए जाते हैं। लंबे समय से उसकी तलाश की जा रही थी और उस पर 25 हजार रुपये का इनाम भी घोषित था।
मंगलवार को सिविल लाइन थाना पुलिस और एसओजी की संयुक्त टीम को सूचना मिली कि सत्तू बामनहेड़ी रेलवे स्टेशन के आसपास मौजूद है। पुलिस टीम ने घेराबंदी की तो उसने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में वह घायल हो गया। उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।
क्रिकेट के मैदान से लेकर नगर निगम की राजनीति और फिर अपराध की दुनिया तक पहुंचने वाले सतपाल उर्फ सत्तू की कहानी कई सवाल छोड़ गई है। एक समय खेल और राजनीति में पहचान रखने वाला व्यक्ति आखिर कैसे अपराध की दुनिया में इतना आगे बढ़ गया कि उसका अंत पुलिस मुठभेड़ में हुआ। यही सवाल आज उसके जीवन की सबसे बड़ी चर्चा बन गया है।

