पूर्व कैदी की दुल्हन बनीं सहायक जेलर फिरोजा खातून, हिंदू रीति-रिवाज से हुई शादी, बजरंग दल ने किया कन्यादान

अनुज त्यागी

मध्य प्रदेश के सतना से एक ऐसी प्रेम कहानी सामने आई है, जिसकी चर्चा अब पूरे प्रदेश में हो रही है। सतना केंद्रीय जेल में पदस्थ सहायक जेलर फिरोजा खातून ने पूर्व उम्रकैदी धर्मेंद्र सिंह के साथ हिंदू रीति-रिवाज से शादी रचाकर समाज को बड़ा संदेश दिया है। दोनों की प्रेम कहानी जेल की चारदीवारी के भीतर शुरू हुई थी और अब सात फेरों तक पहुंच गई।

 

बताया जा रहा है कि फिरोजा खातून सतना सेंट्रल जेल में वारंट शाखा की जिम्मेदारी संभाल रही थीं। इसी दौरान उनकी मुलाकात धर्मेंद्र सिंह से हुई, जो हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहा था। जेल में धर्मेंद्र वारंट संबंधी कार्यों में सहयोग करता था। काम के दौरान दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई, जो धीरे-धीरे दोस्ती और फिर प्यार में बदल गई।

धर्मेंद्र सिंह छतरपुर जिले के चंदला क्षेत्र का रहने वाला है। साल 2007 में चंदला नगर परिषद के तत्कालीन उपाध्यक्ष कृष्णदत्त दीक्षित की हत्या के मामले में उसे दोषी ठहराया गया था। इसी मामले में उसे उम्रकैद की सजा हुई थी। करीब 14 साल जेल में बिताने के दौरान उसके व्यवहार में बदलाव आया और अच्छे आचरण की वजह से साल 2022 में उसे रिहा कर दिया गया। जेल से बाहर आने के बाद भी फिरोजा और धर्मेंद्र के बीच बातचीत जारी रही और दोनों का रिश्ता पहले से ज्यादा मजबूत हो गया।

हालांकि दोनों का यह रिश्ता आसान नहीं था। फिरोजा खातून मुस्लिम परिवार से ताल्लुक रखती हैं, जबकि धर्मेंद्र सिंह हिंदू परिवार से हैं। अलग-अलग धर्म होने की वजह से फिरोजा के परिवार ने इस शादी का विरोध किया और समारोह से दूरी बना ली। इसके बावजूद फिरोजा ने अपने फैसले से पीछे हटने से इनकार कर दिया।

5 मई को छतरपुर जिले के लवकुशनगर में दोनों की शादी पूरी तरह हिंदू रीति-रिवाज और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न हुई। दूल्हा-दुल्हन पारंपरिक परिधानों में बेहद आकर्षक नजर आए। शादी की तस्वीरें सामने आने के बाद यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।

इस शादी में सबसे ज्यादा चर्चा कन्यादान की रस्म को लेकर रही। परिवार की गैरमौजूदगी में विश्व हिंदू परिषद के जिला उपाध्यक्ष राजबहादुर मिश्रा और उनकी पत्नी ने फिरोजा खातून का कन्यादान किया। वहीं, बड़ी संख्या में बजरंग दल के कार्यकर्ता भी शादी समारोह में मौजूद रहे। उन्होंने पिता और भाई की भूमिका निभाते हुए शादी की सभी रस्मों में हिस्सा लिया।

शादी के बाद सतना केंद्रीय जेल में भी इस प्रेम कहानी की चर्चा हो रही है। लोग इसे सामाजिक सौहार्द, विश्वास और प्रेम की मिसाल बता रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि जेल की चारदीवारी के भीतर शुरू हुई यह कहानी इस बात का संदेश देती है कि मोहब्बत और इंसानियत किसी मजहब की मोहताज नहीं होती।

 

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