दवा कारोबार पर नए नियम का विरोध, व्यापारियों के हित में नहीं DTAB का प्रस्ताव: सुभाष चौहान
मुजफ्फरनगर। दवा कारोबार से जुड़े नए नियमों को लेकर दवा व्यापारियों में असंतोष बढ़ता नजर आ रहा है। मुजफ्फरनगर केमिस्ट एवं ड्रगिस्ट एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष सुभाष चौहान ने भारत सरकार द्वारा प्रस्तावित Drug Technical Advisory Board (DTAB) के सुझावों को व्यापारियों के हित के खिलाफ बताया है।
सुभाष चौहान ने कहा कि DTAB द्वारा ड्रग रूल 1945 के नियम 64 में बदलाव का प्रस्ताव रखा गया है, जिसके तहत “कंपोनेंट पर्सन” यानी जिम्मेदार व्यक्ति की योग्यता अनिवार्य करने की बात कही गई है। इस प्रस्ताव के अनुसार अब दवा व्यापार से जुड़े व्यक्ति के लिए रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट, डी-फार्मा, बी-फार्मा या फिर बीएससी के साथ दो साल का अनुभव होना जरूरी किया जा रहा है। इसके अलावा 6 माह का ऑनलाइन सर्टिफिकेट कोर्स भी प्रस्तावित है।
उन्होंने कहा कि यह नियम जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाता। मुजफ्फरनगर ही नहीं, बल्कि पूरे देश में दवा के होलसेल कारोबार से जुड़े व्यापारियों में मात्र 10 प्रतिशत ही बीएससी ग्रेजुएट हैं। ऐसे में यह प्रस्ताव हजारों व्यापारियों के सामने रोजगार का संकट खड़ा कर सकता है।
सुभाष चौहान ने यह भी बताया कि मौजूदा समय में ड्रग पोर्टल पर गोदाम का विकल्प तक उपलब्ध नहीं है, जिससे पहले ही होलसेल व्यापारी परेशान हैं। ऐसे में नए और कठोर नियम लागू करने से व्यापारियों की समस्याएं और बढ़ेंगी।
उन्होंने भारत सरकार से मांग की कि दवा व्यापार में सरलीकरण की नीति अपनाई जाए और पुराने नियमों के तहत ही व्यापार करने की अनुमति दी जाए। साथ ही रिटेल दवा दुकानों में फार्मासिस्ट की अनिवार्यता को समाप्त करने की भी अपील की।
जिला अध्यक्ष ने कहा कि सरकार को इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार करते हुए व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखना चाहिए, ताकि दवा कारोबार सुचारू रूप से चलता रहे और छोटे व्यापारियों पर अनावश्यक बोझ न पड़े।

