चरथावल में भाकियू की पंचायत, स्मार्ट मीटर का किया विरोध, समस्याओं को लेकर किसानों ने सौंपा ज्ञापन
असलम त्यागी | चरथावल
मुजफ्फरनगर के चरथावल ब्लॉक परिसर में भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) ने गुरुवार को एक विशाल पंचायत का आयोजन किया। पंचायत में भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत और राष्ट्रीय महासचिव राजवीर जादौन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। पंचायत का नेतृत्व एनसीआर अध्यक्ष विकास शर्मा ने किया, जिसमें सैकड़ों किसानों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
पंचायत में किसानों ने अपनी समस्याओं को लेकर सरकार और प्रशासन पर गंभीर निशाना साधा। नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि समस्याओं का समाधान शीघ्र नहीं हुआ, तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा। विशेष रूप से राकेश टिकैत ने स्मार्ट मीटर का विरोध जताते हुए कहा कि इन्हें किसी भी कीमत पर नहीं लगने दिया जाएगा। उन्होंने किसानों पर दर्ज फर्जी मुकदमों को तत्काल समाप्त करने की भी मांग की।
पंचायत में ग्राम चोकड़ा और कुल्हेड़ी की कोऑपरेटिव सोसाइटी से जुड़े मुद्दों पर मौके पर ही निर्णय लिए गए। घोषणा की गई कि ग्राम चोकड़ा में एक महीने के भीतर समिति निर्माण कार्य शुरू होगा, जबकि ग्राम कुल्हेड़ी में चार महीने के भीतर नई को-ऑपरेटिव सोसाइटी की नींव रखी जाएगी।
किसानों ने पंचायत में आवारा पशुओं की समस्या, जर्जर सड़कों की मरम्मत, बिजली विभाग द्वारा उत्पीड़न, नलकूपों पर हो रही चोरी और स्मार्ट मीटर जैसी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया।
पंचायत के समापन के बाद, भाकियू पदाधिकारियों ने प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन एसडीएम सदर प्रवीण कुमार द्विवेदी और सीओ सदर डॉ. रविशंकर को दिया गया। ज्ञापन में ग्राम कुल्हेड़ी में ट्रांसफार्मर की स्थापना, आवारा पशुओं से फसलों की सुरक्षा, सड़कों का निर्माण, बिजली उत्पीड़न पर रोक और चोरी की घटनाओं की शिकायतों के समाधान की मांग प्रमुख रूप से शामिल थीं।
इस अवसर पर पंचायत का संचालन राजेंद्र भगत ने किया, जबकि अध्यक्षता नंदकिशोर शर्मा ने की। पंचायत में पूर्व जिला पंचायत सदस्य कामिल त्यागी और मास्टर आरिफ सहित दर्जनों लोगों ने भाकियू की सदस्यता ग्रहण की। इसके अलावा, धीरज लाटियान, मोनू प्रधान, कपिल सोम, सचिन चौधरी, कपिल खटियान, मोहित शर्मा, परविंदर ढाका, पवन त्यागी, नीटू त्यागी, साबू पुंडीर, सरफराज त्यागी, बृजपाल राणा, सुदामा शर्मा, समद चौधरी सहित सैकड़ों किसान उपस्थित रहे।
पंचायत का माहौल शांतिपूर्ण था, लेकिन किसानों में अपनी समस्याओं के समाधान को लेकर स्पष्ट रूप से चिंता और असंतोष देखा गया।


