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यूजीसी एक्ट के विरोध में उपवास को हरिद्वार जा रहे महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी उत्तराखंड बॉर्डर पर रोके गए

महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी जी महाराज ने स्वयं के लिए फांसी की मांग की।

उत्तर प्रदेश–उत्तराखंड बॉर्डर | 25 जनवरी 2026

शिवशक्ति धाम डासना के पीठाधीश्वर एवं श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी जी महाराज को उत्तराखंड पुलिस ने हरिद्वार जाने से रोक दिया। वे यूजीसी एक्ट के विरोध में हरिद्वार स्थित सर्वानंद घाट पर एक दिन का सांकेतिक उपवास करने जा रहे थे। बॉर्डर पर भारी पुलिस बल की तैनाती के कारण उन्हें उत्तर प्रदेश–उत्तराखंड सीमा पर ही रोक लिया गया।

महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी जी महाराज ने इस कार्रवाई को अपने लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने कहा कि यूजीसी एक्ट के मुद्दे पर संत समाज की चुप्पी सनातन धर्म के लिए घातक संकेत है। इसी दौरान उन्होंने स्वयं को अपमानित महसूस करते हुए अपने लिए फांसी की मांग भी की।

यति नरसिंहानंद गिरी जी महाराज का कहना है कि यूजीसी एक्ट हिंदू समाज को विभाजित करने वाला कानून है और इसके माध्यम से जातीय संघर्ष की स्थिति पैदा की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह एक अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य हिंदू समाज को कमजोर करना है। उन्होंने संत समाज से इस विषय पर मौन तोड़ते हुए खुलकर विरोध करने की अपील की।

महामंडलेश्वर अपने साथ वर्ल्ड रिलिजियस कन्वेंशन की मुख्य संयोजक डॉ. उदिता त्यागी, शिष्य यति रणसिंहानंद जी, यति अभयानंद जी, यति धर्मानंद जी, मोहित बजरंगी एवं डॉ. योगेन्द्र योगी के साथ हरिद्वार जा रहे थे।

उन्होंने यह भी बताया कि इससे पहले 23 जनवरी को बसंत पंचमी के अवसर पर यूजीसी एक्ट के विरोध में दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्राणदान की घोषणा के साथ प्रदर्शन के लिए जाते समय गाजियाबाद पुलिस ने शिवशक्ति धाम डासना को पुलिस छावनी में तब्दील कर उन्हें मंदिर परिसर में ही नजरबंद कर दिया था।

फिलहाल इस पूरे मामले में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।


 

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