सपा सरकार में दर्ज हुए 13 साल पुराने मुकदमे में पूर्व विधायक उमेश मलिक दोषमुक्त, जिला न्यायालय का बड़ा फैसला
Anuj Tyagi
मुज़फ्फरनगर।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जनपद मुज़फ्फरनगर में मंसूरपुर थाना क्षेत्र से जुड़े 13 साल पुराने राजनीतिक मुकदमे में बुढ़ाना के पूर्व विधायक उमेश मलिक को जिला न्यायालय ने दोषमुक्त कर दिया है। कोर्ट ने माना कि घटना से संबंधित कोई भी विश्वसनीय साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए सभी आरोप निराधार पाए गए।
यह मुकदमे सपा सरकार के दौरान दर्ज किए गए थे। मामला वर्ष 27 सितंबर 2012 से संबंधित है, जब गांव खब्बोपुर में भाजपा बूथ अध्यक्ष राहुल शर्मा की दिनदहाड़े हत्या हुई थी। घटना के तीसरे दिन पूर्व विधायक उमेश मलिक मृतक के अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट पहुंचे थे। उसी समय, आरोप है कि कुछ विशेष वर्ग के लोगों द्वारा पूर्व विधायक की छवि धूमिल करने और राजनीतिक दबाव बनाने के उद्देश्य से उनके साथ कुल 11 लोगों पर 147, 148, 149, 452, 427, 506 IPC के तहत रिपोर्ट लिखाई गई।
करीब 13 वर्षों तक यह मामला सेशन कोर्ट में चलता रहा। सुनवाई के दौरान कुल आठ अभियुक्तों के विरुद्ध विचारण हुआ।
आज माननीय न्यायालय ने स्पष्ट कहा कि ग्राम में ऐसी कोई घटना होने के पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं, इसलिए सभी अभियुक्तों को पूरी तरह दोषमुक्त किया जाता है।
यह मामला जनपद की एमपी-एमएलए कोर्ट (देवेंद्र फौजदार) में भी विचाराधीन था, जहाँ अधिवक्ताओं श्यामवीर बालियान, बिजेंद्र मलिक और सौरभ ने मजबूत पैरवी की।
पूर्व विधायक उमेश मलिक ने फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा—
“यह मुकदमे राजनीतिक द्वेष और दबाव में दर्ज कराए गए थे। सच को देर से ही सही, लेकिन अदालत ने सामने रख दिया। मुझे न्यायपालिका पर हमेशा से विश्वास था और आज वही विश्वास मजबूत हुआ है।”

