हल्द्वानी। हत्या के मामले में सजायाफ्ता अफजाल अली को जिंदा होने के बावजूद किस तरह कागजों में मारने का खेल खेला गया। इसे लेकर कई चौंकाने वाली बातें और सामने आ चुकी है। आज की तारीख में भी खुले आसमान के नीचे घूम रहे अफजाल अली को कब्रिस्तान कमेटी ने 2013 में में ”दफ्न” कर दिया था। कब्रिस्तान की रसीद के आधार पर नगर निगम से 2्र014 में फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाया गया।
प्रमाणपत्र तैयार करने के लिए भरे जाने वाले फार्म में मौत की सूचना देने वाले के लिए अपना नाम लिखना जरूरी होता है। अफजाल अली की फाइल में इस शख्स का नाम है अफजाल अली निवासी आजाद नगर थाना बनभूलपुरा। पढ़कर सीधा सवाल उठा कि क्या अफजाल खुद ही अपना झूठा मृत्यु सर्टिफिकेट बनाने के लिए निगम पहुंच गया था? मगर ऐसा नहीं है।
दरअसल, इस अफजाल के आगे लिखा था मृतक का ”खलेला” भाई। यानी मौसी का लड़का। लेकिन पुलिस जांच में पता चला कि इस नाम का कोई व्यक्ति है ही नहीं। यानी भाई भी ”कागजी” निकला।
दरअसल, इस अफजाल के आगे लिखा था मृतक का ”खलेला” भाई। यानी मौसी का लड़का। लेकिन पुलिस जांच में पता चला कि इस नाम का कोई व्यक्ति है ही नहीं। यानी भाई भी ”कागजी” निकला।

