लखनऊ। किसानों की आय बढ़ाने के लिए योगी सरकार सब्जियों के राजा आलू की मुश्किलें दूर करने में जुटी है। आगरा में अंतरराष्ट्रीय आलू अनुसंधान केंद्र की स्थापना के लिए तेजी से काम किया जा रहा है। सहारनपुर और कुशीनगर में एक्सीलेंस सेंटर खोले जाएंगे। इनके माध्यम से बेहतर प्रजातियां तैयार होंगी और बीज की उपलब्धता की समस्या का भी निदान होगा।
आलू के उत्पादन में प्रदेश का देश में पहला स्थान है। देश की कुल उपज का लगभग 35 प्रतिशत उत्पादन यहीं होता है। आलू उत्पादक किसान लंबे समय से प्रदेश के कृषि जलवायु क्षेत्र के अनुसार शोध और नवाचार की कमी का मुद्दा उठाते रहे हैं। आगरा में अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र की स्थापना की मांग भी लंबे समय से की जा रही थी।
वर्तमान में राष्ट्रीय आलू अनुसंधान केंद्र हिमाचल के शिमला में है और प्रदेश में इसका केवल एक केंद्र मेरठ हैं, जबकि एक अन्य केंद्र बिहार के पटना में स्थित है। यहां होने वाले शोध आदि लाभ किसानों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाता है। बुआई के समय किसानों के लिए बेहतर प्रजातियों के बीज की भी समस्या आती है।
इसके चलते अब प्रदेश सरकार ने आगरा में अंतरराष्ट्रीय आलू अनुसंधान संस्थान पेरू की शाखा खोलने की प्रक्रिया तेज कर दी है। इसके लिए पिछले दिनों पेरू संस्थान के डॉ. साइमन हेक के साथ बैठक की गई थी और आगरा में केंद्र की स्थापना के लिए काम को आगे बढ़ाया जा रहा है।
मेरठ, अलीगढ़, आगरा, कानपुर, मुरादाबाद और बरेली मंडलों में शामिल जिलों में प्रदेश के 75 प्रतिशत आलू का उत्पादन होता है। इनमें आगरा में केंद्र शुरू होने से यहां के किसानों को बड़ा लाभ होगा।
वहीं, अन्य क्षेत्रों के किसानों की सुविधा के लिए सहारनपुर और कुशीनगर में भी आलू के लिए एक्सीलेंस सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों के जरिये किसान कम समय में अधिक तापमान सहने वाली और अधिक उपज वाली प्रजातियों के बारे में जागरूक होंगे।

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