मेरठ। मेरठ से दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे होते हुए गाजियाबाद जाने वाले वाहन चालकों पर टोल टैक्स की अधिक मार पड़ेगी। सोमवार की रात 12 बजे से मेरठ से सराय काले खां तक जाने वाले कार चालकों को काशी टोल प्लाजा पर 165 रुपये के बजाय 170 रुपये शुल्क देना होगा। 24 घंटे में दोनों तरफ का शुल्क 250 रुपये के स्थान पर 255 रुपये देना होगा। बस-ट्रक के टोल में 10 रुपये की बढ़ोत्तरी की गई हैं। अलग-अलग वाहन श्रेणी के लिए अलग-अलग दरें तय की गई हैं।
काशी टोल प्रभारी भूपेश त्यागी ने बताया कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के आदेश के अनुपालन में सोमवार की रात 12 बजे से इस मार्ग पर टोल की दरें बढ़ेंगी। एनएचएआई ने एक अप्रैल से दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर टोल शुल्क में 5 से 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी करने के लिए प्रस्ताव भेजा था। अब यह मंजूरी मिल गई है।

5 से 10 प्रत‍िशत की हुई बढ़ोत्तरी

इस एक्सप्रेस-वे पर फिलहाल टोल शुल्क 2.19 रुपये प्रति किलोमीटर है। संशोधित टोल दरों का प्रस्ताव एनएचएआई की परियोजना कार्यान्वयन इकाई द्वारा 25 मार्च को दिया गया था। 2022 में टोल टैक्स सीमा में 10 से 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई थी, जिससे राष्ट्रीय राजमार्गों पर चलने वाली सभी प्रकार की कारों के लिए टैरिफ शुल्क में 10 रुपये से 60 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई थी। इस बार यह बढ़ोत्तरी मात्र 5 से 10 प्रतिशत हैं।

अप्रैल से सभी वाहनों पर फास्‍ट टैग पर पांच रुपये वापसी पर टोल प्लाजा का शुल्क बढ़ जाएगा। इसमें कार, जीप व दो एक्सेल ट्रक और बस शामिल हैं, जबकि तीन व चार एक्सल और ओवरसाइज वाहनों पर आने व जाने दोनों में पांच-पांच रुपये की बढ़ोतरी होगी। हर साल टोल प्लाजा से आवागमन करने वाले वाहनों पर शुल्क तो बढ़ाया जा रहा है, लेकिन बलरामपुर में टोल प्लाजा पर व्यवस्थाएं शून्य है।

एनएच 730 पर वर्ष 2019 के बाद से आवागमन करने वालों को टोल प्लाजा से गुजरने पर शुल्क देकर यात्रा करना पड़ रहा हैं। बड़गौ टोल प्लाजा के आसपास दुर्घटनाएं होने के बाद घायलों को त्वरित सहायता प्रदान करने के लिए कोई भी सुविधा नहीं है। प्राथमिक उपचार की कोई व्यवस्था नहीं है। मेडिसिन रूम तो बनाया गया है, लेकिन कोई दवा उपलब्ध नहीं है। इस कमरे को प्लाजा कर्मी आवास के रूप में प्रयोग कर रहे हैं।

एनएचएआइ द्वारा बनाया गए वॉशरूम में दरवाजे, पल्ले गायब हो चुके हैं। शौचालय में पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। दुर्घटनाग्रस्त वाहन को खींचने के लिए क्रेन भी नहीं है। ऐसे में टोल प्लाजा पर शुल्क देकर यात्रा करना यात्रियों को नागवार लगता है। यहां पर कुल छह लेने बनाए गए हैं। इसमें चार लेन पर नियमित रूप से यात्री वाहन आवागमन करते हैं। जबकि एक-एक लेन को सुरक्षित रखा जाता है। अधिक भीड़ बढ़ने पर उस लेन से वाहनों को गुजारा जाता है।

मैनेजर अमित यादव का कहना है कि अमूमन इस सड़क पर बहुत ज्यादा भीड़ का दबाव नहीं है। केवल देवीपाटन मेला या मंदिर पर भीड़ का दबाव बढ़ने पर ही यहां वाहनों का दबाव बढ़ता है। ऐसे समय पर वाहनों को सुरक्षित लेन से निकाल दिया जाता है। बताया कि टोल प्लाजा में स्थित वाशरूम सही है। जिसका प्रयोग हो रहा है। जो बाहर बना हुआ है वह अव्यवस्थित है। क्रेन, प्राथमिक उपचार आदि के लिए उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है।

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