महाकुंभ नगर। दिव्य और भव्य महाकुंभ में आस्थावानों की भीड़ निरंतर आ रही है। देश के कोने-कोने से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पावन संगम में डुबकी लगाने के लिए आ रहे हैं। सामान्य दिनों में स्नानार्थियों की अप्रत्याशित भीड़ आने से शहर में जहां चौतरफा जाम लगा रहा, वहीं दबाव अधिक होने से हाईवे पर वाहन रेंगते रहे।

वीकेंड की तरह सोमवार को भी भीड़ कम नहीं हुई, जिस कारण महाकुंभ मेला क्षेत्र से नो व्हीकल जोन को नहीं हटाया गया है। लोगों की आस्था और उत्साह बता रहा है कि 20 घंटे में एक लाख 80 हजार वाहनों का जिले में प्रवेश और निकासी हुई।

वहीं, पिछले सोमवार की तुलना में इस सोमवार करीब 25 हजार अधिक गाड़ियां आईं। सोमवार रात आठ बजे तक 1.35 करोड़ लोगों ने स्नान किया। हालांकि मेला क्षेत्र की पार्किंग नहीं खोलने और जगह-जगह बैरिकेडिंग लगाने से कुछ स्थानों पर श्रद्धालु परेशान हुए।

मुख्य स्नान पर्व समाप्त होने के बाद भी भारी भीड़

पांच मुख्य स्नान पर्व समाप्त होने के बावजूद सड़क, रेल और वायु मार्ग से श्रद्धालु मेला क्षेत्र पहुंचकर मां गंगा का आशीष प्राप्त कर रहे हैं। माघी पूर्णिमा के बाद भी सड़कों पर श्रद्धालुओं के पैदल चलने का क्रम नहीं टूट रहा है।

नो व्हीकल जोन घोषित कर दिया गया

शुक्रवार को भीड़ के अनुमान के आधार पर पूरे मेला क्षेत्र को नो व्हीकल जोन घोषित कर दिया गया था। शनिवार के बाद रविवार को मौनी अमावस्या की तरह भीड़ उमड़ने पर पुलिस को प्लान बदलना पड़ा। उम्मीद जताई गई कि सोमवार को भीड़ कुछ कम होगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

पाकिंग फुल, भीड़ के दबाव में रेंग रहे वाहन

दिल्ली, कानपुर, लखनऊ, जौनपुर, वाराणसी, मीरजापुर, बांदा, चित्रकूट और कौशांबी मार्ग से रविवार रात 12 बजे से लेकर सोमवार रात आठ बजे तक पौने दो लाख वाहनों का आवागमन हुआ। इस दौरान भीड़ का दबाव अधिक होने के कारण सड़कों पर वाहन रेंगते रहे, जिससे श्रद्धालुओं को पार्किंग तक पहुंचने में कठिनाई का सामना करना पड़ा। संगम से नजदीक वाली पार्किंग प्लाट नंबर 16 फुल चल रही है।

जाम लगने के प्रमुख कारण

  • सामान्य दिन में भी अनुमान से अधिक भीड़ का आना।
  • मेला क्षेत्र की पार्किंग और सभी पांटून पुल न खोलना।
  • श्रद्धालुओं द्वारा निजी वाहनों का अत्यधिक प्रयोग करना।
  • श्रद्धालुओं की पार्किंग की बजाय संगम पहुंचने की जिद
  • बैरिकेडिंग लगाकर पैदल चलने श्रद्धालुओं को रोकना

नहीं खोले जा रहे सभी पांटून पुल

एक तरफ श्रद्धालुओं के लिए सुगम यातायात का दावा किया जा रहा है तो दूसरी तरफ पैदल आवागमन के लिए भी सभी पांटून पुल नहीं खोले जा रहे हैं। जो खोले भी जा रहे हैं, उनके बंद होने का कोई समय निर्धारित नहीं है। इससे श्रद्धालुओं को झूंसी से अरैल, परेड क्षेत्र में जाने और परेड से उस तरफ पहुंचने में मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है। कुछ श्रद्धालुओं ने बताया कि पांटून पुल बंद होने के कारण उन्हें 10 से 15 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ा।

अनुमान से अत्यधिक भीड़ आ रही है। ज्यादातर स्नानार्थी निजी वाहनों का प्रयोग कर रहे हैं, जिससे सड़क पर दबाव बढ़ा है। शहर में यातायात धीमा है। सुगम यातायात के लिए सभी कदम उठाए जा रहे हैं। -नीरज पांडेय, डीसीपी ट्रैफिक

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