आगरा। ताज महोत्सव के रंग बिखरने से पहले ही एक तस्वीर पर काली दाग आ गए हैं। महोत्सव में लड़खड़ाती व्यवस्थाओं की वजह से पद्मश्री अवार्डी लाजवंती को सोमवार को पूरा दिन सड़क पर बिताना पड़ा। अधिकारियों से बार-बार निवेदन किया लेकिन कानों में शायद रुई लगी थी। वह 12 घंटे से अधिक समय तक वह शिल्पग्राम के बाहर अपने सामान की हिफाजत करती रहीं।
एक पद्मश्री कलाकार की ऐसी हालत देखकर लोग देखते, व्यवस्था को बुरा-भला कहते लेकिन व्यवस्था को फिर भी लाज नहीं आ रही थी। उधर लाजवंती की वेदना का रंग हर पल बीतते-बीतते बढ़ता जा रहा था। पंजाब के पटियाला के त्रिपुरी की लाजवंती वर्ष 1993 से ताज महोत्सव में फुलकारी के सूट व स्टाल लेकर आ रही हैं।
वर्ष 2021 में उन्हें तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पद्मश्री से सम्मानित किया था। मंगलवार से शुरू होने वाले महोत्सव में अपनी कला के प्रदर्शन को वह सोमवार सुबह पांच बजे शिल्पग्राम पहुंच गई थीं। शिल्पग्राम में प्रवेश नहीं मिलने पर उन्होंने अपना सामान गेट के बाहर सड़क पर रख लिया।
स्टाल आवंटन के लिए चक्कर काटती रहीं
सूर्योदय के बाद उन्होंने पर्यटन विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया, तो जवाब था कि सुबह 10 बजे आएंगे। कार्यालय का समय होता है, आपको धैर्य रखना चाहिए। अधिकारी आ गए लेकिन व्यवस्था शायद अनुपस्थित थी। ऐसे में उन्हें 10 बजे के बाद भी शिल्पग्राम में सामान लेकर प्रवेश नहीं मिल सका। दिनभर वह दूसरे शिल्पियों के भरोसे अपना सामान छोड़कर शिल्पग्राम में बार-बार स्टाल आवंटन को चक्कर काटती रहीं।
आखिर शाम 5:30 बजे सूर्य छिपा तो अंधेरे वाली व्यवस्था जागी। स्टाल आवंटित लाजवंती को किया। उन्हें सामान अंदर ले जाने की अनुमति मिल सकी। पद्मश्री लाजवंती ने बताया कि किसी महोत्सव में पहली बार उनके साथ ऐसा हुआ।
नाराजगी जताते हुए कहा, पद्मश्री का तमगा…
पर्यटन विभाग के कई लोगों से संपर्क कर उन्होंने बताया कि पूर्व में शिल्पी शिल्पग्राम में अपना सामान लेकर आते थे और स्टाल आवंटित होने के बाद उसे सजा लेते थे। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि पद्मश्री का तमगा किसे दिखाऊं? नागपुर व हरियाणा में उन्हें महोत्सव में छूट मिलती है, लेकिन 1.3 लाख रुपये का डिमांड ड्राफ्ट एडवांस दिए जाने पर भी उन्हें इंतजार करना पड़ रहा है। कश्मीर से पश्मीना शाल लेकर आए फैयाज और दिल्ली से जरदोजी वर्क का सामान लेकर आईं निशात को भी शाम ढलने तक स्टाल आवंटन का इंतजार करना पड़ा।
ताज महोत्सव के उद्देश्य
- महोत्सव का आयोजन व उससे संबंधित सभी व्यवस्था करना, जिससे मेले में देश के विभिन्न प्रांतों के राष्ट्रीय या प्रदेशीय पदक प्राप्त शिल्पकारों द्वारा निर्मित वस्तुओं तथा हैंडीक्राफ्ट व हैंडलूम का प्रदर्शन व बिक्री हो सके।
- देश व प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहरों यथा नृत्य, संगीत, नाटक एवं प्रदेश के परंपरागत लघु उद्योगों की झांकी प्रस्तुत करना, जिससे भारतीय व विदेशी पर्यटकों को देश व प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहरों को जानने का अवसर मिले।

