हर साल चार फरवरी को विश्व कैंसर दिवस मनाया जाता है। इसमें कैंसर के प्रति लोगों को जागरूक किया जाता है। विश्व कैंसर दिवस के मौके में डॉ. कचनार वर्मा ने बताया कि ब्रेस्ट कैंसर की इस तरह से प्राथमिक पहचान का यह नया मामला नहीं है। ऐसे केस लगातार हो रहे हैं। ब्रेस्ट कैंसर के मरीजों में तेजी से वृद्धि होने का कारण यही है कि प्राथमिक परेशानी होने पर महिलाएं से नजरअंदाज करती हैं, जबकि ब्रेस्ट में गांठ चाहे मामूली ही क्यों न हो, समय से जांच न कराने पर गंभीर हो सकती है।
सात महीने की गर्भवती थी महिला
यह जानकारी देते हुए मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज की पैथालाजी विभाग की प्रोफेसर डॉ. कचनार वर्मा ने बताया कि महाकुंभ मेला से जो महिला लाई गई थी एसआरएन अस्पताल के पीएमएसएसवाई भवन में उसकी एफएनएसी की गई। जबकि महिला अपनी जांच कराने को तैयार नहीं थी। वह सात महीने की गर्भवती थी। जिस परिवार के साथ वह आई थी, उसके कई बार कहने के बाद जांच कराई।
जांच में सामने आई ब्रेस्ट कैंसर की बात
एफएनएसी में पता चला कि उसे इन्फ्लामेट्री ब्रेस्ट कैंसर है। इसके बाद बायोप्सी हुई तो रिपोर्ट धनात्मक आ गई। इससे समय रहते महिला में ब्रेस्ट कैंसर का पता चल गया। परिवार ने कहा कि महिला का इलाज लखनऊ में कराएंगे।
ऐसे होती है ब्रेस्ट कैंसर की जांच
डॉ. कचनार वर्मा ने बताया कि एफएनएसी टेस्ट स्तन में गांठ या कुछ भी असामान्य होने पर वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए डायग्नोस्टिक टेस्ट है। इसमें त्वचा के जरिए एक पतली सुई से गांठ के ऊतक का नमूना लिया जाता है। माइक्रोस्कोप से इसकी जांच की जाती है तो कैंसर के लक्षण होने या न होने की जानकारी मिलती है। इस टेस्ट से शरीर में पनपती असामान्य कोशिकाओं का पता चलता है।

