देहरादून। उत्तराखंड में मौसम शुष्क बना हुआ है और पहाड़ से मैदान तक धूप खिल रही है। जिससे पारा भी तेजी से चढ़ रहा है। दून में अधिकतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया है, जो सामान्य से चार डिग्री सेल्सियस अधिक है।

हालांकि, आज मौसम का मिजाज बदल सकता है। दून समेत आसपास के क्षेत्रों में आंशिक बादल मंडराने और कहीं-कहीं हल्की वर्षा के आसार हैं। दून में शुक्रवार को सुबह से ही धूप खिली रही। दिन में तेज धूप में पारे में भी इजाफा हुआ और गर्माहट महसूस की गई।

कोहरा भी परेशानी बढ़ा रहा

पहाड़ी क्षेत्रों में भी दिन में ठंड कम हो गई है। हालांकि, सुबह-शाम ठिठुरन बनी हुई है। ज्यादातर क्षेत्रों में न्यूनतम तापमान सामान्य है और पाले के कारण रात को ठंडक है। इसके अलावा मैदानी क्षेत्रों में कहीं-कहीं हल्का कोहरा भी परेशानी बढ़ा रहा है। हालांकि, आज मौसम करवट बदल सकता है।

आज यहां होगी बार‍िश

मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक बिक्रम सिंह के अनुसार, आज देहरादून, उत्तरकाशी, चमोली और आसपास के क्षेत्रों में आंशिक बादल छाये रह सकते हैं। कहीं-कहीं गरज-चमक के साथ हल्की वर्षा-बौछारें भी पड़ सकती हैं। जिससे पारे में भी गिरावट आ सकती है। इसके बाद आगामी तीन फरवरी से प्रदेश के ज्यादातर क्षेत्रों में हल्की वर्षा-बर्फबारी के आसार हैं।

शहर, अधिकतम और न्यूनतम तापमान

  • देहरादून, 25.0, 7.9
  • ऊधमसिंह नगर, 25.1, 5.7
  • मुक्तेश्वर, 16.2, 2.6
  • नई टिहरी, 15.6, 4.4

नैनीताल में अब नहीं ग‍िरता पाला

नैनीताल। सरोवर नगरी में शीतकाल में बर्फबारी के साथ पाला गिरना करीब-करीब बंद हो चला है। पर्यावरण विशेषज्ञों की मानें तो तापमान में वृद्धि से पाला गिरना बंद हुआ है। जलवायु परिवर्तन का बड़ा प्रभाव नैनीताल के मौसम में नजर आने लगा है। अतीत में नैनीताल में शीतकाल में बहुत सर्दी होती थी। जिसमें पाले की बड़ी भूमिका होती थी।

हालांक‍ि इस बार दिसंबर के दो दिन छोड़ दें तो यहां बाकी दिनों में पाला नहीं गिरा। नौ दिसंबर को बर्फ गिरने के बाद दो दिन पाला गिरा। अब जनवरी माह खत्म होने को है और पाला गिरना बंद हो गया है। आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान के निदेशक व वायुमंडलीय विज्ञानी डॉ. मनीष नाजा इसकी वजह तेजी से बढ़ते तापमान बताते हैं।

वह कहते हैं इस बार तापमान निरंतर बढ़ता रहा। तापमान का निचला स्तर गिरने के बजाय बढ़ रहा है। जिससे पाला गिरने की कंडीशन बन ही नहीं पाई। इसका बुरा असर नमी पर पड़ा है। आद्रता की मात्रा सामान्य स्तर तक नहीं पहुंच पाई। आद्रता में कमी आने से भी पाले में असर पड़ा है। पाला भले ही कृषि के लिए हानिकारक है, लेकिन पर्यावरण की दृष्टि से इसे नजर अंदाज नहीं किया जा सकता। अभी फरवरी माह शेष है, जिसमें पाला गिरने की उम्मीद की जा सकती है।

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