लखनऊ। लोक निर्माण विभाग ने प्रदेश के असुरक्षित पुलों का सर्वेक्षण पूरा कर लिया है। पहले किए गए सर्वेक्षण में असुरक्षित पुलों की संख्या 83 थी। ताजा सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश भर में 99 पुल असुरक्षित पाए गए हैं, जबकि 66 पुल अति क्षतिग्रस्त स्थिति में हैं। विभाग ने इनमें से अति क्षतिग्रस्त पुलों के निर्माण की सूची तैयार कर ली है।
इनमें कन्नौज की गंग नहर पर 173 वर्ष व औरैया में यमुना नदी पर 170 वर्ष पहले बना पुल भी शामिल है। विभागीय मंत्री होने के नाते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिहार में पुलों के गिरने की घटना के बाद उत्तर प्रदेश में 50 वर्ष की आयु पूरी कर चुके सभी पुलों की जांच के निर्देश लोक निर्माण विभाग को दिए थे।
शासन ने लोनिवि को दोबारा जांच करने का दिया था आदेश
इसके बाद लोक निर्माण विभागl ने पुलों की जांच कराई गई थी। इस जांच में 83 पुल असुरक्षित पाए गए थे। शासन ने लोक निर्माण विभाग को दोबारा सभी असुरक्षित पुलों की जांच कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद नए सिरे से सभी असुरक्षित पुलों का सर्वेक्षण कर उसकी रिपोर्ट विभाग ने तैयार की है।
31 पुलों के निर्माण को कार्ययोजना में किया गया शामिल
31 पुलों के निर्माण को कार्ययोजना में शामिल किया गया है, जबकि कुछ पर यातायात बंद करने व सुरक्षा को लेकर सूचना बोर्ड लगाने के निर्देश संबंधित जिला प्रशासन को दिए गए हैं। असुरक्षित पाए गए सबसे पुराने पुलों में कानपुर देहात के रसूलाबाद में बने 150 वर्ष पुराने पुल के अलावा करहल में गंगा नहर पर 109 वर्ष पहले बना पुल भी शामिल हैं।
इन जिलों में पाए गए सबसे ज्यादा अनसेफ ब्रिज
वहीं देवरिया में छोटी गण्डक नदी पर बने 104 वर्ष पुराने पुल, औरैया में अछल्दा नहर पर व पुरहा नदी पर 100 वर्ष पहले बने पुलों को भी सूची में शामिल किया गया है। इसके अलावा सिद्धार्थनगर में आठ, कानपुर देहात में सात, उन्नाव और सहारनपुर में चार-चार पुल असुरक्षित पाए गए हैं।
इन क्षतिग्रस्त पुलाें की कराई जाएगी मरम्मत
इसके अलावा मैनपुरी, अमेठी, कानपुर नगर, सीतापुर, गाजीपुर, रामपुर, झांसी और सोनभद्र में तीन-तीन पुल जर्जर स्थिति में पाए गए हैं। वहीं सुलतानपुर, आजमगढ़, बरेली, शाहजहांपुर, गोरखपुर, जालौन, हरदोई, लखीमपुर खीरी, बागपत और प्रयागराज में दो-दो पुल क्षतिग्रस्त की स्थिति में हैं जिनकी मरम्मत कराई जाएगी।

