किन्नर अखाड़ा की आचार्य महामंडलेश्वर डॉक्टर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने कहा कि सनातन धर्म की मजबूती के लिए समाज के योग्य धर्मगुरुओं को महामंडलेश्वर और श्रीमहंत बनाया गया है। जगद्गुरु स्वामी महेंद्रानंद गिरि और महामंडलेश्वर जय अम्बानंद गिरि ने किन्नर अखाड़ा और लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी के प्रयासों की सराहना की है। कार्यक्रम में रात्रि दास ने मोहक नृत्य प्रस्तुत किया। इस दौरान महामंडलेश्वर कौशल्यानंद गिरि, महामंडलेश्वर कनकेश्वरी नंद गिरि, महामंडलेश्वर पवित्रानंद गिरि, महामंडलेश्वर नीलम आदि मौजूद रहे।
नारी सशक्तिकरण में आगे निकला जूना अखाड़ा
महिलाओं की संन्यास दीक्षा का अनुष्ठान 27 जनवरी को संभावित -दीक्षा लेने जा रही महिलाओं में उच्च शिक्षा प्राप्त अधिक जागरण संवाददाता, महाकुंभ नगर : नारी सशक्तिकरण में महाकुंभ एक नया इतिहास लिखने जा रहा है। मातृ शक्ति ने अखाड़ों से जुड़ने में जिस तरह से रुचि दिखाई है, महिला संन्यासियाें की दीक्षा हो रही है यह सनातन की शक्ति है।
दो सौ से अधिक महिलाओं की सन्यास दीक्षा होगी
महिला संत दिव्या गिरि बताती हैं कि इस बार महाकुंभ में अकेले श्री पंच दशनाम जूना अखाड़े के अंतर्गत 200 से अधिक महिलाओं की संन्यास दीक्षा होगी। सभी 13 अखाड़ों को अगर शामिल कर लिया जाय तो यह संख्या 1000 का आंकड़ा पार कर जाएगी। 27 जनवरी को संन्यास दीक्षा का अनुष्ठान संभावित है। संत दिव्या गिरि बताती हैं कि इस बार जो दीक्षा संस्कार प्राप्त कर रही महिलाओं में उच्च शिक्षा प्राप्त अधिक हैं जो आध्यात्मिक अनुभूति के लिए संस्कार दीक्षित हो संन्यासी बनेंगी।
पीएचडी करने वाली राधेनंद भारती 12 सालों से गुरु की सेवा में
गुजरात के राजकोट से आई राधेनंद भारती संस्कार की दीक्षा लेंगी। राधेनंद कालीदास रामटेक विश्वविद्यालय में संस्कृत में पीएचडी कर रही हैं। राधेनंद भारती बताती हैं कि आध्यात्मिक अनुभूति के लिए उन्होंने संन्यास लेने का फैसला किया। पिछले 12 साल से वह गुरु की सेवा में हैं।
जूना अखाड़े ने मातृ शक्ति को दी नई पहचान
मातृ शक्ति को पहचान दिलाने में श्री पंचदशनाम जूना अखाड़ा आगे है। महाकुंभ के पहले जूना अखाड़े महिला की संतों के संगठन माई बाड़ा को नया नाम दिया गया है संन्यासिनी श्री पंच दशनाम जूना। संत दिव्या गिरि बताती हैं कि महिला संतों ने संरक्षक महंत हरि गिरि से इसकी मांग की गई थी। उन्होंने महिला संतों से ही नए नाम का प्रस्ताव देने के लिए कहा था। महंत हरि गिरि ने इसे स्वीकार कर लिया है।

