बौना बाबा हैं दत्त महाराज के आराधक
मात्र ढाई फीट लंबाई वाले 75 वर्षीय अवधूत बौना बाबा महाराष्ट्र के पंढरपुर से महाकुंभ में आए हैं। दत्त महाराज की साधना में लीन यह संत किसी भी संकल्प या मांग से परे केवल ईश्वर की आराधना में तल्लीन रहते हैं। उनका कहना है कि उन्होंने जीवन को पूरी तरह से भक्ति के लिए समर्पित कर दिया है।
हाथ उठाकर साधना करते हैं कड़े बाबा
मध्य प्रदेश के महाकाल गिरी, जिन्हें कड़े बाबा के नाम से जाना जाता है, साढ़े आठ वर्ष से अपने हाथ को ऊपर उठाए हुए हैं। उनका यह कठोर तप गौमाता की रक्षा के लिए कानून बनाए जाने के संकल्प के साथ जारी है।
वह न केवल अपने हाथ को स्थिर रखते हैं, बल्कि वस्त्रों का त्याग कर, केवल आकाश के नीचे अपनी साधना करते हैं। उनके नाखून सात-आठ सेंटीमीटर तक बढ़ चुके हैं, जो उनकी तपस्या के प्रतीक हैं।
सिर पर सवा दो लाख रुद्राक्ष धारण कर चुके हैं महंत गीतानंद
कोट का पुरा पंजाब से आये “सवा लाख रुद्राक्ष वाले” के नाम से चर्चित श्रीमहंत गीतानंद गिरि ने अपने सिर पर रुद्राक्ष की मालाओं को धारण कर रखा है। 2019 के अर्धकुंभ में उन्होंने 12 साल तक सिर पर रुद्राक्ष धारण का संकल्प ले लिया था। जैसे-जैसे भक्तों से रुद्राक्ष की माला मिलती गई, गीतानंद उसे सिर पर धारण करने लगे।
लक्ष्य था कि सवा लाख रुद्राक्ष पहन लेंगे, वर्तमान में संख्या सवा दो लाख पहुंच चुकी है, जिनका वजन करीब 45 किलो हो गया है। बताया कि प्रत्येक दिन 12 घंटे तक इसे सिर पर पहने ही रहते हैं, उद्देश्य सनातन धर्म की मजबूती से रक्षा और जनकल्याण का है।

