इसलिए पड़ता है पाला
जब किसी जगह पर बहुत ठंड पड़ने से वहां का तापमान शून्य डिग्री सेल्सियस पर पहुंच जाता है तो हवा में मौजूद नमी बर्फ बनकर पत्तियों पर जम जाती हैं। इसे ही पाला कहते हैं। कभी कभी इतना पाला पड़ता है कि पौधों की पत्तियों में मौजूद नमी का भी बर्फ जम जाता है जो पत्तियों को नष्ट कर बाहर निकल आता है।
ऐसे बचाएं फसलों को
- खेतों में नमी बनाए रखें।
- खेतों में सल्फर का प्रयोग करें।
- खेतों में मेढ़ पर झाड़ी लगाएं।
- पाला पड़ने की संभावना पर -सब्जी के खेतों में जगह जगह अलाव जलाएं।
- पौधों की नर्सरी को पॉलीथिन से ढककर रखें।
बिना कोहरे, बिना पाले के बिजनौर में छाई सूखी ठंड
जिले में कोहरा भी समय से पहले आया और पारा भी सामान्य दिनों से पहले गिर गया लेकिन तापमान में ठंड अब बढ़ रही है। सूखी ठंड का प्रकोप है। शीत एक मिनट के लिए कम नहीं हो रहा है। बल्कि शाम होते होते ठंड और बढ़ने लगती है। नवंबर के दूसरे सप्ताह में कई दिन तक लगातार कोहरा छाया था और ठंड बढ़ गई थी।
नंवबर में पड़ा था कोहरा
नवंबर में आमतौर पर इतना कोहरा नहीं आता है। कोहरा गायब हुआ तो मौसम में फिर गुलाबी ठंड बन गई। इसके बाद कोहरा इक्का दुक्का दिन ही आया। चार पांच दिन पहले मौसम ने एक बार फिर से करवट बदलनी शुरू की और अब पाला पड़ रहा है। शनिवार को जिले का न्यूनतम तापमान 4.2 डिग्री सेल्सियस रहा जो इस सीजन में सबसे कम है। अधिकतम पारे ने भी गोता लगाया है। आमतौर पर दिसंबर के पहले सप्ताह में जिले में आठ डिग्री सेल्सियस से भी अधिक तापमान रहता है लेकिन अब तापमान चार डिग्री सेल्सियस तक है।

