अशोक बालियान, चेयरमैन,पीजेंट वेलफेयर एसोसिएशन
देश में विपक्ष और कुछ संगठन किसानों व महिला पहलवानों को गुमराह करने का कार्य कर रहे है और ये संगठन देश की गौरव महिला पहलवानों को फिर इस्तेमाल करने में लग रहे है। दिल्ली महिला रेसलर्स आन्दोलन के समय कुछ महिला पहलवानों ने कुश्ती संघ के अध्यक्ष पर यौन शोषण का आरोप लगाया था, उस केस में न्याय व्यवस्था के अनुसार केस दर्ज हुआ था और कोर्ट में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। अब इन महिला पहलवानों को अपना सबूत कोर्ट में रखना होगा और फिर न्यायलय के फैसले का इंतजार किया जाना चाहिए। यही राय हमने इनके आन्दोलन के समय देते हुए कहा था कि आपको न्याय क़ानूनी व्यवस्था के तहत ही मिलेगा।
अभी हाल में ही भारतीय कुश्ती संघ के चुनाव में पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के करीबी संजय सिंह के चुनाव में जीतने पर पहले साक्षी मलिक ने कुश्ती से संन्यास का ऐलान किया और इसके बाद बजरंग पूनिया ने अपना पद्मश्री सम्मान लौटा दिया है। इससे पहले दिल्ली आन्दोलन के समय ये खिलाडी अपने मेडल गंगा में बहाने के लिए हरिद्वार पहुच गए थे और अब बजंरग पुनिया ने अपना पद्मश्री प्रधानमंत्री आवास के पास बाहर ही रख दिया है। महिला पहलवानों के दिल्ली में आन्दोलन के दौरान इनके मंच से “मोदी तेरी कबर खुदेगी, आज नहीं तो कल खुदेगी” जैसे अभद्र नारे भी सुनाई दिए थे।
भारतीय कुश्ती संघ के चुनाव में अध्यक्ष पद के उम्मीदवार संजय सिंह के पक्ष में 40 वोट पड़े, जबकि उनकी प्रतिद्वंद्वी अनीता श्योराण को केवल 7 वोट मिले है। बिना क़ानूनी प्रक्रिया के किसी को चुनाव लड़ने से नहीं रोका जा सकता है। वाराणसी समेत पूर्वांचल में कुश्ती अरसे से परंपरागत तरीके से अखाड़ों में मिट्टी पर खेली जाती थी। इसे गद्दे पर लाने में भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष चुने गए संजय सिंह ने अहम भूमिका निभाई थी। इससे महिला कुश्ती को खूब बढ़ावा मिला, जिसका परिणाम रहा कि देश में अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय पहलवान की लंबी सूची बन गई।

फोटो अशोक बालियान
महिला पहलवानों के आन्दोलन में शुरू से ही राजनीति हो रही है और इनको बार-बार गुमराह किया जा रहा है। महिला पहलवानों के दिल्ली आन्दोलन के दौरान एक नाबालिग ने भी यौन शोषण आरोप लगाये थे, जबकि उसके चाचा ने उसी समय कहा था कि साक्षी मलिक और विनेश फोगाट ने उनके भाई को गुमराह कर असत्य आरोप मेरी भतीजी से लगवाये है व मेरी भतीजी के साथ कुछ नहीं हुआ है। कुछ समय बाद नाबालिग व उसके परिवार में पुलिस को ब्यान दिया था कि उनकी बेटी के साथ यौन शोषण नहीं हुआ था।
भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने 28 अप्रैल 2023 को दो मामले दर्ज किए थे, उनमे से नाबालिग वाले केस में अंतिम रिपोर्ट लग गयी थी। दुसरे मामले में महिला खिलाडियों को अब कोर्ट से न्याय मिलना है। दिल्ली में महिला आन्दोलन के समय केंद्र सरकार के खेल मंत्री श्री अनुराग ठाकुर ने भी खिलाडियों से वार्ता की थी।और कहा था कि आपके केस में पुलिस निष्पक्ष जाँच करेगी व न्याय व्यवस्था के तहत आपको न्याय मिलगा।
इसी तरह केंद्र सरकार ने कृषि कानूनों को लेकर किसान संगठनों से ग्यारह दौर की वार्ता की थी और हर बार सरकार ने कहा था कि सरकार हर बिदु पर चर्चा करने को तैयार है,लेकिन किसान संगठन कृषि कानून को रद्द करने की मांग पर अड़े हुए थे।और बाद में किसान हित के कृषि कानून केंद्र सरकार ने वापिस ले लिए थे। अब किसान संगठन के नेता अलाप कर रहे है कि सरकार किसानों की जमीन छीन लेगी, इसलिए आगामी लोकसभा चुनाव में बीजेपी को हराना होगा, जबकि जब कृषि क़ानूनों का ये विरोध कर रहे थे तब भी ये किसानों की गुमराह कर कह रहे थे कि इन क़ानूनों से किसानों की ज़मीन छीन जाएगी।जब ये क़ानून समाप्त हो गये, तो फिर किसानों को गुमराह कर रहे है, यह समझ से परे है।यदि हम आंकड़े देखे तो मोदी सरकार में किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिला है।और एमएसपी पर अधिक ख़रीद हुई है।
भारत की अंडर 20 विश्व चैंपियन व युवा महिला पहलवान अंतिम पंघाल ने विनेश फोगाट को एशियाई खेलों के लिए चयन ट्रायल से छूट दिए जाने पर सवाल उठाए थे। भारतीय ओलिंपिक संघ की अंतरिम कमिटी ने विनेश (53 किलो) और बजरंग पूनिया (65 किलो) को एशियाई खेलों में सीधे प्रवेश देने का फैसला किया था, जबकि बाकी पहलवानों को 22 और 23 जुलाई को ट्रायल से गुजरना था। युवा महिला पहलवान अंतिम पंघाल जैसी कई महिला पहलवानों ने इस पर आपत्ति उठाई थी। बाद में विनेश फोगाट चोट लगने के कारण एशियाई खेलों से हट गयी थी तथा बजरंग पूनिया एशियाई खेलों में पांचवे स्थान पर रहे थे।
अब सवाल यह उठा था कि युवा महिला पहलवान अंतिम पंघाल का कैरियर संकट में किसने डाला था? जवाब है कि ये सब महिला रेशलरों व उनकों गुमराह करने वालों ने डाला था, क्योकि इन्होने महिला पहलवानों के आंदोलन को भाजपा के विरोध में स्पोर्ट किया था न कि महिला पहलवानों के समर्थन में किया था।और इस प्रकार युवा महिला पहलवानों का केरियर चौपट कर दिया गया था। जबकि हमने उस समय भी इनकी उचित मांगों का समर्थन किया था और केन्द्रीय खेल मंत्री अनुराग ठाकुर से भी मिले थे।
अभी हाल में ही उपराष्ट्रपति जगदीप धनकड़ के अपमान के विरोध में खाप पंचायत व अखिल भारतीय जाट महासभा ने 21 दिसंबर को दिल्ली में जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया था। इस पर एक स्वम्भू व्यक्ति जो एक जातीय संगठन का लम्बे समय से राष्ट्रीय महासचिव बना हुआ है, उसने इस विरोध प्रदर्शन का विरोध किया है। जबकि जंतर-मंतर नई दिल्ली पर जाटों व किसानों ने भारी संख्या में इस विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया था।
जबकि गठवाला खाप के मुखिया चौधरी राजेन्द्र मलिक, अहलावत खाप के मुखिया गजेन्द्र सिंह अहलावत, सांगवान खाप के प्रधान व दादरी से निर्दलीय विधायक सोमबीर सांगवान व ढांडा खाप के प्रधान देवव्रत ढांडा ने जहां इसे महामहिम उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, जाट समुदाय और किसानों का अपमान बताया है।
केन्द्रीय मंत्री डॉ संजीव बालियान ने भी इस धरने में समाज के बीच में बैठकर कहा था कि भारतीय समाज व संस्कृति बुजुर्गों के सम्मान के लिए जानी जाती है, अपमान के लिए नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ देश विरोधी संगठनों द्वारा जनभावनाएं भड़काने की कोशिश की जा रही है, हमें इनसे सावधान रहने की जरूरत है।क्योकि देश विरोधी संगठनों को वर्तमान में भारत की छवि और इसकी लंबे समय से चली आ रही समकालिक संस्कृति को बदनाम करने की कोशिश में लिप्त होते देखा जा रहा है।
ये रेसलर्स देश का गौरव है और इन्हें इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। हम इनसे अपील करते है कि इन्हें अपने निर्णय पर पुन: विचार करें। हम इनसे ये भी कहना चाहते है कि इनकी उचित मांगों पर हम इनके इनके साथ रहेंगे।

