गोरखपुर एक्सप्रेसवे के लिए भूमि अधिग्रहण का ग्रामीणों ने किया विरोध, बाजार भाव से मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को नौकरी की मांग

अनुज त्यागी

मुजफ्फरनगर। गोरखपुर एक्सप्रेसवे के लिए प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण को लेकर जिले के छपार थाना क्षेत्र के गांव कुतुबपुर में स्थित शिव मंदिर परिसर में ग्रामीणों की एक बड़ी पंचायत आयोजित की गई। पंचायत में क्षेत्र के करीब 30 गांवों से पहुंचे किसानों और ग्रामीणों ने भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पर अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि उपजाऊ कृषि भूमि के अधिग्रहण से हजारों परिवारों की आजीविका प्रभावित होगी।

पंचायत में कुतुबपुर, बरला, फलौदा, मांडला, रेता नंगला, केन्दकी, गोपाली, समाभलकी, रोहाना सहित कई गांवों के ग्रामीण बड़ी संख्या में शामिल हुए। बैठक के दौरान वक्ताओं ने कहा कि प्रस्तावित एक्सप्रेसवे की जद में आने वाली अधिकांश जमीन अत्यंत उपजाऊ है और वर्षों से इसी खेती के सहारे ग्रामीणों का जीवन-यापन हो रहा है। यदि यह जमीन अधिग्रहित की जाती है तो अनेक परिवारों के सामने रोजगार और आजीविका का संकट खड़ा हो जाएगा।

पंचायत की अध्यक्षता मनोज त्यागी ने की, जबकि संचालन विचित्र त्यागी ने किया। दोनों ने कहा कि ग्रामीण अपनी मांगों को लेकर एकजुट हैं और उचित समाधान के बिना भूमि अधिग्रहण स्वीकार नहीं करेंगे। उनका कहना था कि प्रशासन और सरकार किसानों की भावनाओं तथा भविष्य को ध्यान में रखते हुए निर्णय लें।

बैठक को संबोधित करते हुए गांव कुतुबपुर के युवक सिद्धार्थ त्यागी ने ग्रामीणों से भूमि अधिग्रहण के संबंध में निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपनी-अपनी आपत्तियां दर्ज कराने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि इस विषय को लेकर वह कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार से भी मिले थे और उनके कार्यालय में अपनी बात रखी थी, लेकिन अभी तक कोई संतोषजनक समाधान नहीं निकल सका।

सिद्धार्थ त्यागी ने कहा कि यदि सरकार सर्किल रेट के आधार पर मुआवजा देती है तो उस राशि में कहीं दूसरी जगह समान कृषि भूमि खरीदना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि किसानों को ऐसा मुआवजा मिलना चाहिए जिससे वे दूसरी जगह उतनी ही भूमि खरीद सकें। यदि उचित दर पर मुआवजा दिया जाता है तो इस पर विचार किया जा सकता है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में किसान अपनी जमीन देने के पक्ष में नहीं हैं।

ग्रामीणों ने यह भी मांग उठाई कि जिन परिवारों की अधिक भूमि अधिग्रहित होगी, उनके कम से कम एक सदस्य को सरकारी नौकरी या स्थायी रोजगार उपलब्ध कराया जाए, ताकि प्रभावित परिवारों की आर्थिक स्थिति सुरक्षित रह सके। वक्ताओं ने कहा कि यह केवल जमीन का मामला नहीं, बल्कि किसानों के भविष्य और उनकी पीढ़ियों की आजीविका का प्रश्न है।

पंचायत में विपिन त्यागी, नरोत्तम शर्मा, सतपाल त्यागी, डॉ. सुबोध त्यागी, पप्पू धीमान, सचिन त्यागी, नसीम गोपाली सहित विभिन्न गांवों के अनेक किसान और ग्रामीण उपस्थित रहे। बैठक के अंत में निर्णय लिया गया कि किसानों की मांगों को लेकर आगे भी एकजुट होकर आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर प्रशासन के समक्ष सामूहिक रूप से अपनी बात रखी जाएगी।

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