Donald Trump का बड़ा बयान: “मैं न होता तो 3.5 करोड़ लोग मारे जाते, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की भी हो सकती थी मौत”

अनुज त्यागी

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने संबोधन के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य तनाव को लेकर एक बार फिर बड़ा और चौंकाने वाला दावा किया है। ट्रंप ने कहा कि यदि उन्होंने बीच में हस्तक्षेप नहीं किया होता तो हालात इतने भयावह हो सकते थे कि करीब 3.5 करोड़ लोगों की जान जा सकती थी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि उस संघर्ष के दौरान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की जान को भी गंभीर खतरा था।

ट्रंप ने अपने बयान में भारत के “ऑपरेशन सिंदूर” का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय दोनों देशों के बीच स्थिति अत्यंत तनावपूर्ण थी और मामला परमाणु टकराव तक पहुंच सकता था। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने उनसे बातचीत में कहा था कि यदि अमेरिका ने हस्तक्षेप न किया होता तो भारी जनहानि होती, यहां तक कि पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती थी।

अपने ‘स्टेट ऑफ द यूनियन’ संबोधन के दौरान ट्रंप ने यह भी कहा कि अपने कार्यकाल के शुरुआती महीनों में उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को रुकवाने या शांत कराने में भूमिका निभाई। उन्होंने भारत-पाकिस्तान के अलावा अन्य देशों के बीच तनाव कम कराने का भी जिक्र किया और इसे अपनी कूटनीतिक उपलब्धि बताया।

हालांकि, भारत सरकार पहले भी ट्रंप के इन दावों को स्पष्ट रूप से खारिज कर चुकी है। भारत का आधिकारिक रुख रहा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिवसीय सैन्य तनाव के बाद जो युद्धविराम हुआ, वह दोनों देशों के सैन्य संचालन महानिदेशकों (DGMO) के बीच सीधी बातचीत के माध्यम से हुआ था।

भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar ने पहले ऐसे दावों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि किसी तीसरे देश की मध्यस्थता की आवश्यकता नहीं पड़ी। वहीं विदेश सचिव Vikram Misri ने भी स्पष्ट किया था कि पाकिस्तान की ओर से हॉटलाइन पर संपर्क किया गया, जिसके बाद दोनों पक्षों ने संघर्ष विराम पर सहमति बनाई।

ट्रंप के इस ताजा बयान ने एक बार फिर दक्षिण एशिया की कूटनीतिक हलचल को चर्चा में ला दिया है। एक ओर जहां ट्रंप इसे अपनी बड़ी अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि के रूप में पेश कर रहे हैं, वहीं भारत लगातार यह दोहराता रहा है कि किसी भी प्रकार की मध्यस्थता या हस्तक्षेप की बात सही नहीं है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे बयान वैश्विक और घरेलू राजनीति दोनों संदर्भों में दिए जाते हैं, लेकिन भारत-पाकिस्तान जैसे संवेदनशील संबंधों में इन दावों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया आना स्वाभाविक है। फिलहाल, दोनों देशों के बीच स्थिति सामान्य है, लेकिन ट्रंप के बयान ने एक बार फिर उस दौर की घटनाओं को सुर्खियों में ला दिया है।

 

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