अंतरराष्ट्रीय करुणा साहित्यिक संस्थान का डिजिटल कार्यक्रम सम्पन्न

अंतरराष्ट्रीय करुणा साहित्यिक सांस्कृतिक एवं सामाजिक संस्थान के तत्वावधान में ऑनलाइन कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का आरंभ सरस्वती वन्दना से किया गया।मधु स्वामी ने किया।इस डिजिटल कार्यक्रम की कार्यक्रम अध्यक्ष डॉ कनक लता तिवारी जी (मुम्बई) रहीं। मुख्य अतिथि डॉ संतोष खन्ना (दिल्ली) एवं विशिष्ट अतिथि डॉ मृणालिका ओझा (छत्तीसगढ़) और डॉ ऊषा सक्सेना (मुम्बई) रहीं। कार्यक्रम का सानदार संचालन जागृति सिन्हा (मुम्बई) ने किया।

साहित्य के स्तम्भ महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी की जयंती विशेष, महाशिवरात्रि व वसंतोत्सव के आगमन का विषय रहा। सर्व प्रथम पूनम शर्मा (गोरखपुर)ने अपने दोहा – कहता अनुभव कुछ यहां,जगत कहे कुछ और।

खुली आंख रखना सदा, करना सब पर गौर।।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डॉ संतोष खन्ना ने -मेरी सबसे दोस्ती,मेरा सब से प्यार।

अपने प्यारे सबमें भर भर बांटूं प्यार।शिव हैं कण-कण शिव हैं जन- जन धरा और अंबर सत्यम् शिवम् सुंदरम”।डॉ कनक लता तिवारी ने बहती रहो गंगा,बहती रहो गंगा अविचल मीठी -सी मृदु धार लिए। मधु स्वामी ने “हे शिव शंकर भोले तेरे हाथ में कश्ती है, मुझे पार लगा देना,मेरी आंखें बरसती हैं।”डॉ मृणालिका ओझा ने छत्तीसगढ़ी में गायन प्रस्तुति देकर सभी का मन मोह लिया-“जब तोर सुरता,आथे संगी,मन ह महकथे तन है दहकते।” जागृति सिन्हा -हेभोले मेरे शिव भण्डारी हे विशेश्वर महिमा तुम्हारी, मैं मूरख मुझे ध्यान नहीं है,सच और झूठ का ज्ञान नहीं है।”परिणिता सिन्हा (गुरुग्राम) चुंबन है अति प्रासंगिक लेकिन,उस पर हो सीमा नैतिक।चुंबन दिवस का कीजै विस्तार लेकिन नहीं जाए वो मर्यादा की सीमा से पार।”

सभी ने अपने प्रस्तुति से कार्यक्रम को अनोखा और अर्थपूर्ण बना दिया। अंत में संस्था की संस्थापिका एवं अध्यक्ष डॉ आर्यावर्ती सरोज “आर्या ” ने धन्यवाद ज्ञापित कर कार्यक्रम को सम्पूर्ण किया।

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