मेरठ। प्रदेश सरकार के आठ वर्ष पूरे होने पर शहर विधानसभा अंतर्गत महापौर कैंप कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में महापौर हरिकांत अहलूवालिया ने घोषणा की कि मेरठ में औरंगजेब की निशानियों को मिटाया जाएगा।
शहर में औरंगशाहपुर डिग्गी और औरंगशाहपुर गोलाबढ़ दो मोहल्ले हैं। इनके नाम बदले जाएंगे। औरंगशाहपुर डिग्गी का नाम संभाजी नगर और औरंगशाहपुर गोलाबढ़ का नाम शिवाजी नगर किया जाएगा। इसके लिए जल्द नगर निगम की बोर्ड बैठक में प्रस्ताव लाया जाएगा।
मेरठ कैंट विधायक अमित अग्रवाल ने यह प्रस्ताव दिया है। महापौर ने कहा कि कैंट विधायक के प्रस्ताव को नगर निगम की बोर्ड बैठक में रखा जाएगा।
महापौर ने कहा कि औरंगजेब अत्याचारी व लुटेरा शासक था। हमारे देश को लूटने का काम किया है। महापौर ने कहा कि सबसे पहले बेगमपुल का नाम बदलकर भारत माता चौक किया गया है। इसके बाद बेगमबाग का नाम बदलकर रामबाग किया गया है। अब औरंगशाहपुर डिग्गी और औरंगशाहपुर गोलाबढ़ की बारी है। औरंगशाहपुर डिग्गी चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से जुड़ा मोहल्ला है। जबकि औरंगशाहपुर गोलाबढ़ रोहटा रोड पर स्थित है। पहले ये गांव थे। अब निगम क्षेत्र में हैं।
वहीं, भाजपा महानगर अध्यक्ष विवेक रस्तोगी ने कहा कि आने वाली पीढ़ी को बताएंगे कि हमारे देश को लुटने वालों के नाम मिटा दिए गए हैं। भाजपा नेता कमलदत्त शर्मा ने कहा कि आताताई का नाम मिटाना जरूरी है।

जन-जन तक पहुंचाएंगे सरकार की उपलब्धियां

भाजपा महानगर अध्यक्ष विवेक रस्तोगी ने योगी सरकार के आठ साल की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा कि हर घर में कार्यकर्ता जाएंगे। सरकार की उपलब्धियां बताएंगे। यह अभियान 14 अप्रैल तक चलेगा। कहा कि मेडिकल, इंडस्ट्री हर क्षेत्र में विकास हुआ है। महापौर ने कहा कि सपा सरकार में कानून व्यवस्था का हाल किसी से छिपा नहीं है। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ने नेतृत्व में विकास के मायने बदल रहे हैं।

प्रमाण नहीं, लेकिन बादशाह के नाम पर रखे जाते थे नाम

इतिहासविद डा.अमित पाठक ने कहा कि औरंगजेब की निशानियों के लिखित प्रमाण मेरठ में नहीं मिलते हैं। लेकिन यह माना जाता है कि कालांतर में जो बादशाह होते थे। उनके नाम को जोड़कर गांवों के नाम रख दिए जाते थे। औरंगशाहपुर डिग्गी या औंरगशाहपुर गोलाबढ़ के बारे में भी ऐसा ही हुआ हो।

नाम बदलने को अपनाई जाएगी ये प्रक्रिया

सबसे पहले नगर निगम की बोर्ड बैठक में नाम बदलने का प्रस्ताव लाया जाएगा। बहुमत के आधार पर प्रस्ताव को पास किया जाएगा। प्रस्ताव पारित होने के बाद कार्यवृत्त में आएगा। जिसके बाद नगर निगम नाम बदलने का कार्य करेगा। बदले हुए नाम का बोर्ड लगाएगा। दस्तावेजों में नाम परिवर्तन होगा। सदन यह देखती है कि प्रस्तावित नाम किसी महापुरुष या प्रतिष्ठित व्यक्ति का है।

मुजफ्फरनगर का नाम लक्ष्मीनगर रखने का प्रस्ताव

वहीं मुजफ्फरनगर जिला पंचायत ने जिले का नाम लक्ष्मीनगर रखने और एक राष्ट्र-एक चुनाव का प्रस्ताव पास कर मुख्यमंत्री के पास भेजने का निर्णय लिया है।

उधर, मुजफ्फरनगर जिला पंचायत की बोर्ड बैठक में जिला पंचायत सदस्य मनोज कुमार ने जनपद का नाम मुजफ्फरनगर से बदलकर लक्ष्मीनगर करने का प्रस्ताव रखा, जिसका अमरकांत और युनूस के अलावा अन्य सभी सदस्यों ने समर्थन किया। जिला पंचायत अध्यक्ष तेजपाल निर्वाल ने कहा कि यह प्रस्ताव जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री के पास भेजा जाएगा।

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