वहीं, हर्षिल स्थित सेना के हेलीपैड को सड़क से जोड़ने के लिए सड़क का निर्माण किया गया, उस दौरान पहले जनवरी अंत, फिर फरवरी प्रथम सप्ताह और बाद में अंतिम सप्ताह में 27 फरवरी को प्रधानमंत्री का दौरा प्रस्तावित था। लेकिन मौसम सहित अन्य कारणों के चलते संभव नहीं हो पाया। इस बार प्रधानमंत्री का दौरा तय बताया जा रहा है। जिला स्तरीय अधिकारियों ने भी इसकी पुष्टि की है।
युद्धस्तर पर खोला गया हाईवे
बीते सोमवार को मौसम बदलने के साथ ऊंचाई वाले हर्षिल, मुखबा क्षेत्र में बर्फबारी हुई थी। बर्फबारी के कारण गंगोत्री हाईवे सुक्की टाप में फिर से बंद हो गया था, मंगलवार को बर्फबारी थमने पर बीआरओ की टीम ने युद्धस्तर पर सुक्की टाप व सोनगाड क्षेत्र से मशीनें लगाकर हाईवे को खोल दिया है। जो कि वर्तमान में धराली तक आवाजाही के लिए सुचारू है। इसके बाद धराली से लेकर गंगोत्री तक बर्फबारी के चलते हाईवे बंद है, जिसके खोलने के लिए बीआरओ ने मशीनें लगायी हुई हैं।
एसपीजी की टीम भी पहुंची
प्रधानमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था संभालने वाली एसपीजी याने कि स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप की टीम भी मंगलवार को हर्षिल पहुंच गयी है। बताया कि जा रहा है कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सभी तरह के इंतजाम परखने के बाद यह टीम केंद्र सरकार को सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी देगी। सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिए ही केंद्र व राज्य सरकार के करीब 600 से अधिक अधिकारी व कर्मचारी पहुंचने की सूचना है।
प्रधानमंत्री मुखबा में चपकन पहनकर कर सकते हैं पूजा
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी गुरुवार को मुखबा में पारंपरिक परिधान चपकन पहनकर मां गंगा की पूजा-अर्चना कर सकते हैं। गंगोत्री मंदिर समिति ने यह परिधान प्रधानमंत्री को भेंट करने का निर्णय लिया है। मंदिर के तीर्थपुरोहित भी इसी परिधान को पहनकर पूजा करते हैं। पूर्व में प्रधानमंत्री के मुखबा प्रवास के दौरान जाड़-किन्नौरी समुदाय की ओर से तैयार किए जाने वाले पट्टू के कोट-पजामा व पहाड़ी टोपी पहनने की बात सामने आई थी।
पट्टू से ही बनता है चपकन
प्रधानमंत्री के लिए प्रशासन की ओर से तैयार करवाए गए भेंडी अर्थात पट्टू से जहां दो जोड़ी कोट-पजामा व पहाड़ी टोपी तैयार करवाई गई है। मंदिर समिति की ओर से भेंट किया जाने वाला चपकन भी भेंडी से ही तैयार किया जाता है। दोनों ही भेड़ की ऊन से तैयार किए गए परिधान हैं।

