2012 में हुई थी छह लोगों की सामूहिक हत्या
नहीं पहुंचा सगा संबंधी और रिश्तेदार
रिहा होने पर गंभीर को जेल पर लेने कोई सगा संबंधी और रिश्तेदार नहीं आया था। गंभीर सिंह खंदौली में रहने वाले अपने जीजा काे कॉल किया, लेकिन उन्होंने आने से मना कर दिया। बाहर आने के बाद कहीं जाने के लिए उसके पास 300 रुपये थे। यह रकम उसे बैरक में रहने वाले साथी बंदियों राजवीर और विजय ने दी थी।
बोला, मैं निर्दोष फंसाया गया
गंभीर सिंह का कहना है कि पुलिस ने उसे निर्दोष फंसाया था। उसे ईश्र पर भरोसा था कि उनके साथ अन्याय नहीं होने देगा। सेंट्रल जेल के जेलर दीपांकर भारती ने बताया कि मंगलवार देर रात बंदी गंभीर की रिहाई का परवाना आया था।बुधवार सुबह उसे रिहा कर दिया गया।
भाई-भाभी और भतीजों के नाम पर जेलों में लगाए 10-10 पेड़
गंभीर सिंह ने बताया कि भाई सत्य प्रकाश, भाभी पुष्पा और चारों आरती, कन्हैया, मछला व गुड़िया के नाम से जिला और सेंट्रल जेल में 10-10 पौधे लगाए थे। वह सजा सुनाए जाने से पहले जेलों मेंं बगिया कमान में काम करता था।
सजा मिलने के बाद नहीं कराया गया काम
गंभीर सिंह को निचली अदालत ने वर्ष 2017 में फांसी की सजा सुनाई थी। जिसके बाद उसे बगिया कमान से हटा दिया गया था। उससे कोई काम नहीं लिया जा रहा था।

