बरेली। धमाका होने से चंद मिनट पहले ही छोटी बेटी इकरा ने पिता अतीक रजा को फोन किया था। उनसे अपने स्कूल की शिक्षक का नंबर मांगा, कहा कि एडमिट कार्ड लेने जाना है। पिता जब तक नंबर सेंड कर पाते तब तक धमाका हो गया।
धमाके की आवाज से एक बार को लगा कि पड़ोस का ट्रांसफार्मर फटा है, लेकिन जब तक कुछ स्पष्ट होता तब तक बड़ी बहन नीचे आ चुकी थी। उसने पिता का शव देखा तो चीख पड़ी। उसकी आवाज सुनकर इकरा भी नीचे दौड़ी। देखा तो पिता के साथ उनके दो कारीगर जमीन पर पड़े थे।
अतीक रजा खां करीब 56 वर्ष के थे। उनके परिवार में पत्नी फरहीन बेटा लारिफ और दो बेटियां इरम और इकरा हैं। लंबे समय से अतीक मांझा बनाने के इस कारोबार को रहे थे। पहले उनके पिता यह काम करते थे और बाद में अतीक ने उसकी जिम्मेदारी ले ली।

छोटी बेटी की शुरू होने वाली हैं परीक्षाएं

स्वजन ने कभी नहीं सोचा था कि इस तरह की भी घटना हो सकती है। अतीक की सबसे छोटी बेटी इकरा ने बताया कि, उसकी परीक्षाएं शुरू होने वाली हैं। स्कूल में एडमिट कार्ड बांटे जा रहे हैं। उसके पास स्कूल की शिक्षक का नंबर नहीं था। पिता अतीक नीचे काम कर रहे थे और इकरा घर के अंदर थी। शिक्षक का फोन नंबर मांगने पर पिता ने की अंतिम लाइन यही थी कि अभी भेज रहे हैं और इसके बाद धमका हो गया। नीचे आकर देखा तो जगह-जगह खून और मांस के टुकड़े पड़े थे। पिता गंभीर रूप में झुलसे हुए जमीन पर कुछ दूरी पर पड़े थे। पिता से अंतिम बात इकरा की ही हुई थी।

तीन की मौत

धमाका होने के कुछ देर में ही पूरा घर लोगों की भीड़ से भर गया था। सूचना पर जब पुलिस पहुंची तो पता चला कि अतीक और फैजान दम तोड़ चुके थे जबकि, सरताज की सांसे चल रही थीं। जिसकी वजह से उसे अस्पताल भेज दिया गया। मगर अस्पताल पहुंचते हुए उसने भी दम तोड़ दिया और डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।

फैजान की होने वाली थी शादी

स्वजन के अनुसार, फैजान किशोर अवस्था से ही अतीक रजा के यहां ही के यहां काम करता था। जिसकी वजह से अतीक का विश्वास भी उसके प्रति बढ़ गया। फैजान को करीब 10 से 12 साल अतीक के साथ काम करते हुए हो चुके थे। मुहल्ले में कुछ दूरी पर ही उसका भी निवास है, इसलिए अक्सर अतीक फैजान को बुला लिया करता था। इकरा ने बताया कि पिछले दिनों फैजान का निकाह भी तय हो गया था। इसी साल उसका निकाह भी होने वाला था। उससे पहले ही फैजान की भी मौत हो गई।

सीधा था फैजान, सुबह केवल चाय पीकर ही घर से निकला

मृतक फैजान के भाई रिजवान ने बताया कि वह बहुत सीधा था। उसे ज्यादा किसी से कोई मतलब नहीं था। न ही वह इधर-उधर की बातों से मतलब रखता था। जहां आजकल के युवा स्मार्ट फोन चलाते हैं फैजान सादा मोबाइल का भी इस्तेमाल नहीं करता था। रिजवान ने बताया कि शुक्रवार को पूरे बाकरगंज में मांझा बनाने वालों की छुट्टी होती है। इसलिए कोई भी काम पर नहीं आता है।

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