महाकुम्भ का एक ही संदेश, एकता से अखण्ड रहेगा देश : विनीत त्यागी नावला

कुंभ मेला सनातन धर्म के सबसे बड़े और सबसे पवित्र धार्मिक आयोजनों में से एक है, जो हर 12 वर्ष में एक बार होता है। यह सिर्फ धार्मिक आयोजन ना होकर खगोलीय घटनाओं से जुड़ी एक चिर पुरातन परंपरा है, जिसमें ग्रहों की स्थिति का विशेष महत्व होता है और इसी आधार पर इसका आयोजन होता है. प्रयागराज में 13 जनवरी से 26 फरवरी तक चलने वाला महाकुंभ 144 वर्ष बाद आया है।

महाकुंभ के दौरान करोड़ों श्रद्धालु गंगा, यमुना और सरस्वती के पवित्र संगम तट पर स्नान करने के लिए आते हैं। वही विनीत त्यागी ने बताया कि कहा जाता है कि इसमें एक बार स्नान करने से भक्तों के सभी पापों का नाश हो जाता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है और संगम महाकुम्भ में सनातनी लग रहे हैं आस्था की डुबकी और स्नान कर अभिभूत है।

किसान सेवक विनीत त्यागी ने बताया की उत्तर प्रदेश में योगी जी सरकार ने महाकुंभ के सबसे प्रमुख स्नान पर्व मौनी अमावस्या की पुरी तैयारी कर ली है। जिस किसी भी श्रद्धालुओ को कोई असुविधा ना हो, इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार बधाई की पात्र है। अनुमान है मौनी अमावस्या जो की 29 जनवरी 2025 क़ो साही और मुख्य स्नान पर 11 करोड़ श्रद्धालु और सनातनी के आने की उम्मीद जताई जा रही है। ये भारत का अखण्ड वैभव और संस्कृति और संस्कारओ का संगम भी है।

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