अछनेरा के रायभा में नगला बुद्ध मार्ग पर स्थित मनीष अग्रवाल ने गोदाम से चावल की बोरियों भेजने के लिए ट्रक बुलाया था। ट्रक गोदाम के गेट में फंस गया। हाइड्रा से उसे निकलवाते समय लगे जाम के चलते ग्रामीणों की सूचना पर पहुंची पुलिस को गोदाम में चावल के कट्टे दिखाई दिए। गोदाम पर मिले मनीष अग्रवाल को हिरासत में ले लिया। मौके पर बुलाई आपूर्ति विभाग की टीम ने गोदाम में सरकारी राशन का चावल होने की पुष्टि की।
पुलिस को गुमराह करने का किया प्रयास
राशन माफिया सुमित अग्रवाल के जीजा मनीष अग्रवाल ने पुलिस और आपूर्ति निरीक्षक सुनील कुमार को गुमराह करने का प्रयास किया। मौके पर खड़ी कार की चाबी मांगने के बावजूद नहीं दी। बाद में कार को हाइड्रा में लटकाकर को थाने पहुंचाया गया। गोदाम में खड़े टेंपो और ट्रक को भी पुलिस ले गयी। गोदाम से चावल से भरे 300 बोरी बरामद की हैं। खेरागढ़ पुलिस ने राशन माफिया मनीष अग्रवाल समेत चार आरोपितों को संगठित अपराध की धारा में 16 दिसंबर को जेल भेजा था।
पुलिस ने 11 सितम्बर को पकड़ा था राशन का चावल
पुलिस और आपूर्ति विभाग की टीम की पूछताछ में मनीष अग्रवाल ने बताया कि जिस परिसर में 11 सितंबर को भी पुलिस ने छापा मारकर 60 बोरी राशन का चावल बरामद किया था। परिसर के एक हिस्से में बने गोदाम में आपूर्ति विभाग की टीम ने सील लगा दी थी। उसने इसी परिसर में बने दूसरे गोदाम में कालाबाजारी का चावल एकत्रित करना शुरू कर दिया था। बरामद 300 बोरी चावल नौ दिन का स्टाक है। साले सुमित अग्रवाल को जेल भेजने के बाद भी उसने रायभा से कालाबाजारी का काम जारी रखा था। गोदाम को ट्रक में लादकर हरियाणा भेजा जाना था।
डीसीपी पश्चिमी जोन सोनम कुमार ने बताया कि मनीष अग्रवाल के विरुद्ध संगठित अपराध की धारा के तहत मुकदमा दर्ज कार्रवाई की जाएगी। पुलिस-आपूर्ति विभाग की लापरवाही आई सामने चावल की कालाबाजारी करने वाले सिंडिकेट को लेकर पुलिस-आपूर्ति विभाग की लापरवाही एक बार फिर सामने आयी।
गोदाम पर एक बार सील लगाने के बाद दोबारा वहां नहीं झांकने नहीं पहुंची। पुलिस और आपूर्ति विभाग यदि एक बार भी वहां गई होती तो मनीष अग्रवाल का उसी परिसर में दोबारा गोदाम खोलने का दुस्साहस नहीं दिखाता
तत्कालीन एडीएम को किया गया था स्थानांतरित
राशन माफिया से नजदीकी के आरोप में तत्कालीन एडीएम नागरिक एवं आपूर्ति सुशीला अग्रवाल का स्थानांतरित किया गया था। चावल की कालाबाजारी के खेल में तत्कालीन एडीएम की मिलीभगत के आरोप लगे थे।

