बालिग होने पर साध्वी नहीं बनाया तो दे दूंगी जान
किशोरी का कहना है कि बालिग होने पर साध्वी नहीं बनाया तो गंगा में कूदकर जान दे दूंगी। स्वजन ने गुरु को सम्मान न मिलने पर आत्महत्या की धमकी दी है। व्यवसायी दंपति 25 दिसंबर को अपनी दो बेटियों को प्रयागराज महाकुंभ में ले गए थे। वहां उन्होंने जूना अखाड़े में 13 वर्षीय बेटी का दान किया था।
जूना अखाड़े ने संत कौशल गिरि को कर दिया था निष्कासित
जूना अखाड़े के संत कौशल गिरि ने शिविर प्रवेश कराते हुए नया नाम दिया था। उम्र को लेकर शुरू हुए विवाद के बाद अखाड़ा प्रबंधन ने शिविर प्रवेश कराने वाले संत कौशल गिरि को निष्कासित कर दिया था और किशोरी को सम्मान के साथ घर लौटा दिया था। 22 दिन बाद किशोरी परिवार के साथ गुरुवार रात घर लौट आई।
संत कौशल गिरि की सम्मान के साथ अखाड़े में हो वापसी
शुक्रवार को जागरण से बातचीत में किशोरी के पिता ने बताया कि वह चाहते हैं कि संत कौशल गिरि की सम्मान के साथ अखाड़े में वापसी हो। उनके सम्मान से समझौता बर्दाश्त नहीं होगा। यदि गुरु को सम्मान न मिला तो पूरा परिवार आत्महत्या कर लेगा।
दूसरे अखाड़ों में रह रहीं हैं कई बच्चियां
किशोरी ने अपने निर्णय पर अडिग रहने की बात कहते हुए कहा कि बचपन से ही साध्वी बनने की इच्छा प्रबल हो गई थी। भगवा पहन लिया है तो अब यह छूटने वाला नहीं है। अब बालिग होने तक इंतजार कर रही हूं। उसके नाबालिग होने पर जूना अखाड़े से लौटा दिया गया, जबकि प्रयागराज में सजे कई अखाड़ों में तीन, सात और नौ वर्ष की बच्चियां रह रहीं हैं।

