वाराणसी। काशीवासी 86 वर्षीय लेखक व पुराणों का अनुवाद करने वाले एसएन खंडेलवाल का सारनाथ आशापुर स्थित अस्पताल में शनिवार को उपचार के दौरान निधन हो गया। बीते 18 मार्च से सारनाथ के हिरामनपुर स्थित काशी कुष्ठ सेवा संघ आश्रम के एक कमरे में नरसिंह पुराण को हिंदी में अनुवादित कर रहे थे। तबीयत खराब होने पर आश्रम के रमेश चंद्र श्रीवास्तव ने दीर्घायु अस्पताल में भर्ती कराया था।
इधर पुनः किडनी व हार्ट में समस्या होने पर 25 दिसंबर को भर्ती कराया गया था। दाह संस्कार सरायमोहाना घाट पर किया गया। पिंडदान के लिए सामाजिक कार्यकर्ता अमन कबीर को बुलाया गया। मृत्यु के बाद उनके पुत्र अनूप खंडेलवाल को फोन कर बताया गया तो उन्होंने कहा कि हम शहर के बाहर हैं। अंतिम संस्कार के समय परिवार का कोई भी व्यक्ति नहीं आया।

80 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति

एसएन खंडेलवाल ने रमेश चंद्र को बताया था कि उनके पास 80 करोड़ रुपये से अधिक संपत्ति है, लेकिन बेटा-बेटी ने घर निकाला दिया। अब वह सब मेरे लिए बेकार है। खंडेलवाल गुजराती, हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, उड़िया, बांग्ला, असमी भाषा के जानकार थे। उनका जन्म 11 जून 1940 में काशी में दशाश्वमेध स्थित व्यवसायी स्व. द्वारिका नाथ के यहां हुआ था।

कम उम्र में ही लेखन कर दिया था शुरू

एसएन खंडेलवाल ने कम उम्र में ही लेखन शुरू कर दिया था। उन्होंने गीता तत्व बोधिनी, मोक्षु प्रसंग का बांग्ला से हिंदी में अनुवाद व 10 महापुरुषों का प्रसंग लिखा है। 21 उपपुराणों और 16 महापुराणों का संस्कृत से हिंदी में अनुवाद किया था। तंत्र पर करीब 300 किताबें लिखीं। शिवपुराण का पांच खंडों में अनुवाद किया है। अंतिम संस्कार के समय शैलेंद्र दुबे, आलोक गुप्ता, सोनू यादव आदि उपस्थित रहे।

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