जौनपुर। एआइ इंजीनियर अतुल सुभाष की आत्महत्या के मामले की जांच जारी है। अतुल के भाई विकास की तहरीर पर बेंगलुरु पुलिस ने अतुल की पत्नी निकिता सिंघानिया, सास निशा और साले अनुराग को गिरफ्तार कर लिया है। अतुल के पिता पवन अब अपने चार साल के पौत्र को लेकर परेशान हैं। बच्चे के संरक्षण के लिए वह पुलिस से लेकर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री तक को पत्र भेज रहे हैं।
बेंगलुरु पुलिस के इंस्पेक्टर और मामले के जांच अधिकारी ज्ञाना देवा और जौनपुर के इंस्पेक्टर रजनीश कुमार ने बताया कि न्यायिक अभिरक्षा में जेल गई निकिता ने बताया है कि बच्चा फरीदाबाद के एक बोर्डिंग स्कूल में पढ़ता है। फिलहाल, उसकी देखरेख एक रिश्तेदार कर रहे हैं।

निकिता के ताऊ को नहीं है जानकारी

मामले में आरोपित निकिता के ताऊ सुशील सिंघानिया ने बताया कि उन्हें नहीं पता कि बच्चा कहां है। उन्होंने एक अखबार में छपी खबर कि बच्चा उनके पास है, को पूरी तरह गलत बताया। कहा कि उन्हें तो बच्चे का नाम भी नहीं मालूम। उन्हें कोई मतलब नहीं कि बच्चा उसके दादा-दादी को मिलता है या कहीं और रहता है।

फोन करने की एक गलती से पकड़ी गई निकिता

फर्जी केस दर्ज कराने और आत्महत्या के लिए उकसाने की बेंगलुरु में एफआइआर दर्ज होने के बाद गिरफ्तारी से बचने के लिए निकिता लगातार अपना ठिकाना बदल रही थी। उसकी मां निशा और भाई अनुराग प्रयागराज के झूंसी के एक होटल में छिपे थे।

वे अपनी लोकेशन छिपाने के लिए वाट्सएप कॉल कर रहे थे, लेकिन एक फोन कॉल ने उन्हें जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया। निकिता ने गलती से एक रिश्तेदार को फोन कर दिया। बेंगलुरु पुलिस ने उसकी लोकेशन ट्रैक कर ली और गुरुग्राम के रेल विहार के पीजी में पहुंच गई। पुलिस ने निकिता को गिरफ्तार कर मां को फोन करने को कहा। निशा ने जैसे ही कॉल रिसीव की, पुलिस ने प्रयागराज में ट्रैक कर लिया और गिरफ्तार कर लिया।

निकिता के चाचा को हाईकोर्ट से राहत

बहुचर्चित अतुल सुभाष मोदी आत्महत्या प्रकरण में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आरोपित पत्नी निकिता सिंघानिया के चाचा सुशील सिंघानिया की सोमवार को अग्रिम जमानत मंजूर कर ली। यह आदेश न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव ने अतुल सुभाष मोदी सुसाइड मामले में निकिता सिंघानिया और अन्य आरोपियों की अग्रिम जमानत अर्जी पर सुनवाई के बाद दिया है।
उनकी तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष तिवारी ने तर्क दिया कि याचीगण मृतक की पत्नी, सास और साले हैं। उन्हें बेंगलुरु पुलिस ने पहले ही गिरफ्तार कर लिया है और उनकी अग्रिम जमानत अर्जी का कोई मतलब नहीं है। अग्रिम जमानत अर्जी केवल सुशील सिंघानिया के लिए है।

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