मुजफ्फरनगर।सर्कुलर रोड स्थित ऋषभ विहार में आज कैप्टन प्रवीण चौधरी व डॉक्टर नवीन कुहाड़ की माताजी जी दिवंगत स्व.शकुंतला चौधरी की तेहरवीं पर आत्मिक शांति के लिए श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया, श्रद्धांजलि सभा में दिवंगत स्व. शकुंतला चौधरी के तैल्य चित्र पर फूलों की माला चढ़ाकर 2 मिनट का मोन रख कर श्रद्धांजलि अर्पित की, इस मौके पर शांति पाठ का आयोजन भी किया गया ,
कैप्टन प्रवीण चौधरी व डॉक्टर नवीन कुहाड़ की माताजी स्वर्गीय शकुंतला चौधरी के निधन पर उनके निवास पर हवन यज्ञ भी किया गया इस अवसर पर शहर व गाँव के गणमान्य व्यक्तियों समाजसेवियों, प्रबुद्ध जनों ने कैप्टन प्रवीन चौधरी व डॉक्टर नवीन की माता जी दिवंगत स्वर्गीय शकुंतला चौधरी की श्रद्धांजलि सभा में शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किए,तेहरवीं कार्यक्रम में सांसद, विधायक, विभिन्न संगठन,समाजसेवियों व जाट समाज के द्वारा भेजे गए शोक संदेश भी पढ़कर सुनाए गए जिसमें उन्होंने दिवंगत शकुंतला चौधरी के निधन पर अपनी संवेदनाएं व्यक्त की।

श्रद्धांजलि सभा में मुख्य रूप से केंद्रीय मंत्री डॉ संजीव बालियान, जिला पंचायत अध्यक्ष डॉक्टर वीरपाल निर्वाल, पूर्व विधायक अशोक कंसल,विधायक राजीव गुंबर,एमएलसी श्री चन्द्र शर्मा,डॉक्टर विवेक बालियान,भाजपा जिला अध्यक्ष सुधीर सैनी, अमित तोमर,अशोक बालियान,ब्लॉक प्रमुख अक्षय पुंडीर,ब्लाक प्रमुख गौरव पंवार,जिला पंचायत सदस्य,विजय चौधरी, जिला पंचायत सदस्य डॉक्टर विपिन त्यागी, उद्योगपति कुशपुरी,पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष देवव्रत त्यागी, भाजपा नेता अभिषेक गुर्जर चौधरी,भाजपा नेता पुरुषोत्तम गौतम, भाजपा नेता राजीव गर्ग,पुनीत वशिष्ट,भाजपा नेता संजय अग्रवाल,मोनू प्रधान,सुभाष माटियान,मिथुन त्यागी,सुमित जसोई, पत्रकार पवन अग्रवाल,अरविंद भारद्वाज, मदन बालियान,बिनेश पंवार,अनुज त्यागी,प्रवेश मलिक,सचिन जौहरी, समर ठाकुर,धर्मेंद्र कुमार,नन्द किशोर सैनी,अमित कुमार,अभिषेक,सोनू त्यागी,संदीप रंजन,जफर सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोगों की मौजूदगी रही।।

स्वर्गीय शकुंतला चौधरी की पोती मानवी सिंह ने अपनी दादी मां को श्रद्धांजलि देते हुए एक बहुत सुंदर कविता सुनाई
दादी तो सबकी होती है कोई उनके साथ खेले होते है तो कुछ को ये क़िस्मत नहीं मिलती हम चारों बहन भई लक्की है कि हमे अपनी बड़ी मम्मी के साथ इतना टाइम मिला अब जैसे मैंने कहा कि दादी तो सबकी होती है पर ऐसी टीचर कुछ कुछ को ही मिलती है उनकी कभी ना ख़त्म होने वाली स्कूल की कहानियाँ उनका हर अवार्ड पर , कॉम्पिटिशन में हारने पर भी लाड़ करना मुझे मेरी लाड्डो मेरी झाड़ बुलाना और एक ऐसी इमेज बनाना, ऐसे शब्द कहना कि साथ बैठा हर कोई उनकी हिम्मत की उनकी बोल्डनेस की दांत दे उन्हें हर चीज़ की नॉलेज थी हर चीज़ का ज्ञान था अपने कैंसर से वो इतना लड़ी की अब में किसी बीमारी से नहीं डरती हूँ और सच बताऊ तो यक़ीन नहीं होता है कि उनका कमरा अब ख़ाली है , और शायद सुन भी ना पा रही हो मुझे पर जो लोग यहाँ बैठे है उन्हें बस इतना कहूँगी कि अपनी बेटियों को मेरी दादी जैसा बनाना

