आजमगढ़ में पूजा के दौरान खूनी वारदात, पत्नी और दो पुरोहितों की हत्या; बंधक बच्चों को बचाने के दौरान आरोपी की मौत, बेटे ने भी तोड़ा दम
आजमगढ़। अहरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर गांव में मंगलवार शाम पूजा-पाठ के दौरान शुरू हुआ विवाद देर रात बेहद गंभीर घटनाक्रम में बदल गया। आरोप है कि अरविंद सिंह ने घर में चल रहे अनुष्ठान के दौरान अपनी पत्नी बबीता सिंह और पूजा करा रहे दो पुरोहितों की गोली मारकर हत्या कर दी। इसके बाद वह अपने तीन बच्चों के साथ घर के एक कमरे में बंद हो गया। कई घंटे चले पुलिस रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद आरोपी और उसका आठ वर्षीय बेटा शौर्य घायल अवस्था में अस्पताल पहुंचाए गए, जहां दोनों की मौत हो गई। इस घटनाक्रम में कुल पांच लोगों की जान गई है।
तीन दिन से चल रहा था महामृत्युंजय जाप
घटना के बाद अरविंद की मां श्यामबला देवी ने आजतक से बातचीत में घटनाक्रम को लेकर कई बातें बताई हैं। उनके अनुसार, अरविंद के लिए ही घर में पिछले कुछ दिनों से महामृत्युंजय जाप कराया जा रहा था। उनकी पत्नी बबीता तीन पुरोहितों के साथ यह अनुष्ठान करा रही थीं।
श्यामबला देवी के मुताबिक, शाम करीब साढ़े पांच बजे अरविंद घर पहुंचा और पूजा करा रहे पुरोहितों से पहचान संबंधी दस्तावेज दिखाने को कहा। इसी बात को लेकर विवाद बढ़ गया। मां का दावा है कि बबीता ने पुरोहितों से इस तरह पूछताछ किए जाने का विरोध किया, जिसके बाद स्थिति बिगड़ गई।
पुरोहितों पर फायरिंग का आरोप
प्रारंभिक पुलिस और मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, विवाद के बाद अरविंद ने फायरिंग की, जिसमें उसकी पत्नी बबीता और दो पुरोहित महेंद्र पाठक तथा अखिलेश मिश्रा की मौत हो गई। घटना के बाद अन्य लोग वहां से निकल गए और अरविंद अपने बच्चों को लेकर कमरे में बंद हो गया।
मां ने बताई परिवार की पुरानी कहानी

अरविंद की मां श्यामबला देवी ने बातचीत में परिवार से जुड़ा पुराना विवाद भी सामने रखा। उनका कहना है कि 2018 में उनके बड़े बेटे सुनील सिंह की हत्या के बाद से अरविंद काफी परेशान रहने लगा था।
मां के मुताबिक, वर्ष 2015 में बबीता की ओर से पड़ोस के दो लोगों के खिलाफ दर्ज कराए गए एक मामले में दोनों को सजा हुई थी। सुनील की हत्या का मामला भी अदालत में लंबित बताया गया है। श्यामबला देवी ने यह भी कहा कि वारदात में इस्तेमाल हथियार उनके दिवंगत बेटे सुनील का था, जो बाद में अरविंद के पास आया था।
इन पुराने मामलों और मौजूदा वारदात के बीच क्या संबंध है, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
कई घंटे चला पुलिस का रेस्क्यू ऑपरेशन
वारदात की सूचना मिलने के बाद पुलिस और वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। मकान को घेरकर अरविंद को बच्चों के साथ बाहर आने और आत्मसमर्पण करने के लिए समझाने का प्रयास किया गया। बताया गया कि कई घंटे तक बातचीत के बावजूद वह कमरे से बाहर नहीं आया।
पुलिस के अनुसार, बाद में कमरे के भीतर से फायरिंग की स्थिति बनी और बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। पुलिस का कहना है कि कार्रवाई के दौरान अरविंद ने पुलिस टीम पर भी फायरिंग की, जिसके जवाब में पुलिस ने कार्रवाई की। इसमें अरविंद घायल हुआ और बाद में अस्पताल में उसकी मौत हो गई।
घायल बेटे की भी मौत
रेस्क्यू के दौरान अरविंद का आठ वर्षीय बेटा शौर्य भी घायल हुआ था। उसे उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। वहीं अन्य बच्चों को पुलिस ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
पूरे घटनाक्रम को लेकर पुलिस और फोरेंसिक टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाए हैं। पुलिस की जांच में यह स्पष्ट करने का प्रयास किया जा रहा है कि पूजा के दौरान विवाद किस वजह से बढ़ा और घटना के पीछे अन्य कोई कारण था या नहीं।
फिलहाल शंभूपुर गांव में भारी पुलिस बल तैनात है और घटना को लेकर पूरे इलाके में तनाव और दहशत का माहौल है।
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